Israel Election 2026: कौन हैं इज़राइल की अरब पार्टियां, जिन्होंने बदला चुनावी गणित? नेतन्याहू की जीत पर क्यों अटका सवाल?
Israel Election 2026: इज़राइल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के बाद अरब राजनीतिक पार्टियां चर्चा में आ गई हैं। शुरुआती एग्जिट पोल में Joint List और Ra'am को मिलाकर 17 से 19 सीटों के संकेत मिले हैं। वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की Likud पार्टी काफी मजबूत प्रदर्शन कर रही है, लेकिन उन्हें भी गठबंधन की सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का बहुमत अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इज़राइल में इस बार चुनावी मुकाबला केवल नेतन्याहू और उनके विरोधियों के बीच नहीं है। देश के अरब नागरिकों(ज्यादातर मुस्लिम) का राजनीतिक प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियां भी सरकार बनाने के समीकरण में अच्छी भूमिका निभा सकती हैं। अब सवाल है कि ये अरब पार्टियां आखिर कौन हैं, इनके मुद्दे क्या हैं और क्या इनकी बढ़ती ताकत नेतन्याहू की सरकार बनाने की कोशिश पर पानी फेर सकती है? आइए जानते हैं।
कौन हैं इज़राइल की अरब पार्टियां?
इज़राइल की लगभग पांचवीं आबादी अरब नागरिकों की है। इनमें बड़ी संख्या उन फिलिस्तीनी अरब नागरिकों की है, जो इज़राइल के भीतर रहते हैं और राष्ट्रीय चुनावों में मतदान करते हैं। इनके राजनीतिक अधिकारों, सामाजिक सुविधाओं, शिक्षा, रोजगार, समानता और इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष से जुड़े मुद्दों को उठाने वाली कई पार्टियां सक्रिय हैं। 2026 के चुनाव में दो प्रमुख अरब-नेतृत्व वाले राजनीतिक पार्टि चर्चा में हैं।
1. Joint List
यह तीन पार्टियों का चुनावी गठबंधन है:
- Hadash: वामपंथी विचारधारा वाला अरब-यहूदी राजनीतिक संगठन, जो सामाजिक और नागरिक समानता पर जोर देता है।
- Ta'al: अहमद तीबी से जुड़ी पार्टी, जो विशेष रूप से इज़राइल के अरब नागरिकों के अधिकारों की वकालत करती है। और उनके लिए आवाज उठाती है।
- Balad: फिलिस्तीनी राष्ट्रीय पहचान और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाती है।
2026 के चुनाव में इन तीनों पार्टियों ने एक संयुक्त उम्मीदवार सूची के जरिए चुनाव लड़ा। इस गठबंधन के प्रमुख नेताओं में यूसुफ जबारीन और अहमद तीबी शामिल हैं।
2. Ra'am (United Arab List)
Ra'am दूसरी प्रमुख अरब पार्टी है, जिसका नेतृत्व मंसूर अब्बास करते हैं। इस्लामी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी यह पार्टी अरब समुदायों के लिए सरकारी बजट, स्थानीय विकास, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और अपराध नियंत्रण जैसे मुद्दों पर जोर देती है। Ra'am ने Joint List के साथ चुनाव लड़ने के बजाय अलग चुनावी रास्ता चुना। इन दोनों समूहों के राजनीतिक तरीके और प्राथमिकताएं अलग हैं। इसलिए सभी अरब पार्टियों को एक ही विचारधारा वाला संगठन समझ नहीं सकते।
अरब पार्टियों ने चुनाव में कितना दम दिखाया?
27 अक्टूबर को मतदान समाप्त होने के बाद सामने आए एग्जिट पोल में अरब पार्टियों की सीटों में खास बढ़ोतरी के संकेत मिले। अलग-अलग इज़राइली टेलीविजन चैनलों के अनुमान में Joint List और Ra'am को मिलाकर लगभग 17 से 19 सीटें मिलती दिखाई गईं। वहीं, 28 अक्टूबर की आंशिक मतगणना में भी अरब पार्टियों का मजबूत प्रदर्शन सामने आया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अरब समुदायों में मतदाता भागीदारी लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंचने के शुरुआती भी संकेत मिले। यह बढ़ी हुई भागीदारी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, और नेतन्याहू के लिए अभी चिंता का विषय है क्योंकि इज़राइल की संसद में छोटी पार्टियां भी सरकार बनाने के समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, अंतिम सीटों की संख्या वोटों की पूरी गिनती के बाद ही तय होगी।
Netanyahu Won या Netanyahu Loss? क्या है चुनाव का गणित?
इज़राइल की संसद Knesset में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है नेतन्याहू की Likud पार्टी शुरुआती मतगणना में सबसे अधिक वोट हासिल करने वाली पार्टी के रूप में सामने आई है। लेकिन इज़राइल में सबसे बड़ी पार्टी बनने का मतलब अपने आप प्रधानमंत्री पद हासिल करना नहीं है।
28 अक्टूबर की सुबह लगभग 66 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती के समय प्रकाशित आंशिक आंकड़ों में नेतन्याहू समर्थक दलों को 56 सीटें, गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विरोधी दलों को 48 सीटें और अरब पार्टियों को 16 सीटें मिलती दिखाई गई थीं।
ये आंकड़े अंतिम नतीजे नहीं थे और बाद की गिनती के साथ बदल सकते हैं। इसलिए अभी Netanyahu Won या Netanyahu Loss जैसा निश्चित निष्कर्ष निकालना थोड़ी जल्दबाजी होगी। नेतन्याहू के सामने सवाल है कि उनके सहयोगी दल मिलकर बहुमत तक पहुंच पाते हैं या नहीं। वहीं, विरोधी दलों के सामने चुनौती है कि वे एक साझा सरकार के लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटा सकेंगे या नहीं। इस बात की भी पूरी संभावना है कि दोनों मुख्य पार्टियाँ सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों (Arab parties) का समर्थन लेने से कतराएँगी या हिचकिचाएँगी। इसकी वजह यह है कि बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और गादी आइजेंकोट (Gadi Eisenkot) की पार्टियाँ और उनके समर्थक फिलिस्तीन के संघर्ष (Palestinian struggle) को लेकर बिल्कुल अलग और आक्रामक रुख रखते हैं, जिससे अरब पार्टियों के साथ हाथ मिलाना उनके लिए राजनीतिक रूप से बहुत मुश्किल हो जाता है।
क्या अरब पार्टियां नेतन्याहू की सरकार बदल सकती हैं?
इस सवाल को समझने के लिए 2021 का उदाहरण महत्वपूर्ण है। उस समय मंसूर अब्बास की Ra'am पार्टी ने नफ्ताली बेनेट और याइर लापिड के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन किया था। उस गठबंधन ने नेतन्याहू के लंबे कार्यकाल के बाद नई सरकार बनाई थी। लेकिन 2026 की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। कई प्रमुख यहूदी-नेतृत्व वाले विपक्षी दलों ने अरब पार्टियों के साथ औपचारिक गठबंधन बनाने को लेकर आपत्ति जताई है। जैसे हमने अभी ऊपर बात की, दूसरी ओर, Joint List और Ra'am की अपनी अलग राजनीतिक शर्तें और प्राथमिकताएं हैं।
ऐसे में अरब पार्टियों को अधिक सीटें मिलना और उनका अगली सरकार में शामिल होना दो अलग बातें हैं। उनके सांसद किसी गठबंधन के समर्थन, विरोध या संसदीय मतदान में भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इसकी दिशा अंतिम चुनाव नतीजों और राजनीतिक बातचीत से तय होगी
इज़राइल चुनाव का अगला महत्वपूर्ण मोड़ क्या हो सकता है?
इज़राइल के चुनावी नतीजों में अभी अनिश्चितता बनी हुई है। सबसे बड़ी पार्टी, राजनीतिक गठबंधन और प्रधानमंत्री बनने की प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। मतगणना पूरी होने के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग विभिन्न दलों से बातचीत के आधार पर उस सांसद को सरकार बनाने का जिम्मा सौंपेंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना होगी। अरब पार्टियों के प्रदर्शन ने इतना जरूर दिखाया है कि इज़राइल के अरब नागरिकों के वोटों को इस बार चुनावी चर्चा से अलग नहीं रखा जा सकता। फिलहाल असली सवाल यह नहीं है कि नेतन्याहू की Likud सबसे बड़ी पार्टी बनेगी या नहीं, बल्कि यह है कि 120 सदस्यीय संसद में अगली सरकार के लिए जरूरी 61 सांसदों का समर्थन कौन जुटा पाएगा।