CJP Protest: CP में ‘मोदी-मोदी’ के नारे, अभिजीत दिपके और नेहा बोरा हिरासत में

Oct 16, 2026
(0)

CJP Protest: तिरंगा मार्च के बीच गूंजे ‘मोदी-मोदी’ के नारे, नेहा बोरा और अभिजीत दिपके की हिरासत के बाद CP में भारी ड्रामा

दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) में 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर जमकर राजनीतिक हलचल देखने को मिली। एक तरफ तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे लोग थे, तो दूसरी तरफ भारी संख्या में तैनात पुलिसकर्मी। इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। प्रदर्शन स्थल के आसपास ‘मोदी-मोदी’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे भी सुनाई दिए।

यह मार्च सिर्फ तिरंगा लहराने का कार्यक्रम नहीं रह गया था। इसके पीछे पुलिस कार्रवाई, चुनाव आयोग को लेकर विरोध और राजनीतिक टकराव जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए थे।

 

आखिर क्यों निकाला जा रहा था तिरंगा मार्च?

CJP यानी Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम का नाम ‘लहरा दो तिरंगा’ रखा गया था।

इस मार्च की पृष्ठभूमि में CJP से जुड़े दो नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी थी। दोनों को पहले हुए प्रदर्शन के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई थी। CJP समर्थक पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे और तिरंगा लेकर मार्च निकालना चाहते थे।

इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी विरोध प्रदर्शनों का बड़ा मुद्दा बनी हुई थी। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखना चाहिए; उनका अंतिम फैसला जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से होगा।

 

मार्च से पहले अभिजीत दिपके हिरासत में

प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने कनॉट प्लेस में लागू प्रतिबंधों और BNSS की धारा 163 का हवाला दिया।

दिपके की हिरासत के बाद यह सवाल उठने लगा कि जब कार्यक्रम में तिरंगा लेकर जुटने की अपील की गई थी, तो प्रशासन ने इसे रोकने का फैसला क्यों लिया। पुलिस की तरफ से कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़े सवाल उठाए गए, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई।

यहीं से मामला और गरमा गया। CJP समर्थकों के लिए यह केवल एक मार्च का मुद्दा नहीं था, बल्कि अपने नेताओं की हिरासत के विरोध का भी मामला बन गया।

 

नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया

इसी घटनाक्रम के बीच AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिए जाने की खबर आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह मंडी हाउस की तरफ से प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।

नेहा बोरा और दूसरे छात्र संगठनों के प्रदर्शन का फोकस भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध और पुलिस कार्रवाई पर था। इससे कनॉट प्लेस के साथ-साथ मध्य दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी हलचल बढ़ी।

एक तरफ CJP समर्थक तिरंगा मार्च निकालने पर जोर दे रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिस किसी बड़े जमावड़े और संभावित टकराव को रोकने में जुटी थी। नतीजा यह हुआ कि प्रस्तावित कार्यक्रम अपने तय रूप में नहीं चल पाया और अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन होने लगे।

 

CP में ‘मोदी-मोदी’ के नारे, माहौल हुआ राजनीतिक

कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के दौरान ‘मोदी-मोदी’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे सुनाई देने की रिपोर्ट सामने आई। इससे मौके पर मौजूद राजनीतिक तनाव और ज्यादा चर्चा में आ गया।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि किसी प्रदर्शन में नारे लगना अपने आप में पूरे कार्यक्रम की दिशा तय नहीं करता। लेकिन जब एक तरफ सरकार और पुलिस के समर्थन में नारे सुनाई दें और दूसरी तरफ सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन हो, तो मामला जल्दी ही राजनीतिक टकराव का रूप ले लेता है।

CJP के समर्थक अपने मार्च को तिरंगा और विरोध के अधिकार से जोड़ रहे थे। दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई ने कार्यक्रम को लेकर बहस तेज कर दी। सोशल मीडिया पर भी हिरासत, तिरंगा मार्च और नारेबाजी को लेकर चर्चा होने लगी।

 

भारी पुलिस बंदोबस्त, कई जगह प्रदर्शन

दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित मार्च को रोकने के बाद प्रदर्शनकारी अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा हुए। कुछ समूहों ने तिरंगा लेकर मार्च किया और ‘जय हिंद’ जैसे नारे लगाए।

रिपोर्ट्स में दिनभर की कार्रवाई के दौरान करीब 150 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी दी गई। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और उनकी बाद की स्थिति के बारे में ताजा आधिकारिक जानकारी अलग से जांचना जरूरी है। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की अनुमति, सार्वजनिक जगहों पर जुटने के नियम और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस छेड़ दी है।

 

अब आगे क्या होगा?

CJP के तिरंगा मार्च को लेकर विवाद अब सिर्फ कनॉट प्लेस तक सीमित नहीं है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपने नेताओं की हिरासत और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांग रहे हैं। दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक जमावड़े को नियंत्रित करने की दलील दे रहा है।

इस मामले में आगे की तस्वीर पुलिस के आधिकारिक बयान, हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति और प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति से साफ होगी।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 16 अक्टूबर का CJP तिरंगा मार्च दिल्ली में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बन गया। तिरंगा, ‘मोदी-मोदी’ के नारे, नेहा बोरा और अभिजीत दिपके की हिरासत—इन सबने इस प्रदर्शन को चर्चा के केंद्र में ला दिया। अब देखना होगा कि यह विरोध आगे कितना बढ़ता है और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

Research & Analysis by Prinjay Mandani

Making world politics and global facts easy for everyone. We turn complex international news into clear Hindi insights, helping you understand the world without borders.

31 Views

Comments

0
?