भारत-पाक तनाव के बीच इस्लामाबाद पहुंचे भारतीय राजनयिक, क्यों जारी है संवाद?
इस्लामाबाद में सोमवार को एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। खबर आते ही एक सवाल उठा। जब भारत-पाक तनाव इतना गहरा है, तो हमारे राजनयिक वहां क्यों गए? क्या बातचीत फिर शुरू हो गई? जवाब सीधा नहीं है। यह दौरा भारत-पाक तनाव खत्म होने की खबर नहीं है। पर इसे मामूली खबर मानना भी गलत होगा। आगे इस खबर को हर पहलू से समझते हैं-आइए।
इस्लामाबाद में असल में क्या हुआ?
28 सितंबर 2026 को भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, इसकी अगुवाई एक वरिष्ठ राजनयिक कर रहे हैं। वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिन की बैठक में शामिल होंगे।
यह बैठक भारत-पाक तनाव की वजह से नहीं हो रही है। यह एससीओ का तय कार्यक्रम है। पाकिस्तान ने एक सितंबर को किर्गिस्तान से अध्यक्षता ली। अगस्त 2027 में एससीओ का शिखर सम्मेलन भी पाकिस्तान में होगा।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के अनुसार, बैठक में अध्यक्षता के दौरान होने वाले कामों पर चर्चा होगी। आगे की बैठकों की तैयारी भी होगी। पाकिस्तान का जोर संपर्क, नए विचार, आर्थिक सहयोग और लोगों के आपसी मेलजोल पर रहेगा। भारत-पाक तनाव के माहौल में इस बैठक पर सबकी नजर है।
एससीओ क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल है?
एससीओ एक क्षेत्रीय संगठन है। इसके 10 सदस्य हैं। इनमें पांच मध्य एशियाई देश हैं: तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाकिस्तान। रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस भी सदस्य हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े।
भारत 2027 में इंडिया-सेंट्रल एशिया समिट कराने की योजना बना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अगस्त को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को यह बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारी पाकिस्तान में हुई एससीओ बैठकों में पहले भी गए हैं। इसलिए भारत-पाक तनाव के बीच ऐसा दौरा नई बात नहीं है।
क्या यह दौरा भारत-पाक तनाव खत्म होने का संकेत है?
नहीं। यह दो देशों की सीधी बातचीत नहीं है। यह कई देशों की साझा बैठक है। किसी रिपोर्ट में इसे द्विपक्षीय वार्ता नहीं बताया गया है।
हाल में दोनों तरफ से तीखे बयान भी आए हैं। शुक्रवार, 25 सितंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऑपरेशन सिंदूर की आलोचना की। अगले दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर दुनिया की जीरो टॉलरेंस नीति में कोई ढील नहीं हो सकती। भारत अपनी रक्षा का अधिकार भी इस्तेमाल करेगा।
रविवार को "मन की बात" में प्रधानमंत्री मोदी ने भी सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। इन बयानों से साफ है कि भारत-पाक तनाव अब भी बना हुआ है।
पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक तनाव कैसे बढ़ा?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, इसमें 25 भारतीयों और एक नेपाली नागरिक की मौत हुई। इसके बाद भारत-पाक तनाव तेजी से बढ़ा।
भारत ने ये कदम उठाए:
- सिंधु जल संधि को स्थगित रखा गया।
- पाकिस्तानी राजनयिक निकाले गए। इस्लामाबाद से भारतीय अधिकारी वापस बुलाए गए।
- अटारी बॉर्डर बंद हुआ।
- पाकिस्तानी उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद हुआ। आयात पर रोक लगी।
पाकिस्तान ने भी भारतीय एयरलाइनों के लिए हवाई क्षेत्र बंद किया और व्यापार रोक दिया।
ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर के बाद क्या बदला?
7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। सरकार के अनुसार, मकसद पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना था। चार दिन सैन्य कार्रवाई चली।
10 मई 2025 को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ को फोन किया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, फोन दोपहर 3:35 बजे आया। शाम 5 बजे से सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। सरकारी जानकारी के मुताबिक, इसके बाद भी ड्रोन घुसपैठ की कोशिशें हुईं, जिन्हें रोका गया।
फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यापार और सिंधु जल संधि स्थगित रहेंगे। पाकिस्तान अपने अभियान को "बुनयान-उम-मरसूस" कहता है। दोनों देशों के दावे अलग हैं। सीजफायर हुआ, पर रिश्ते सामान्य नहीं हुए। इसलिए भारत-पाक तनाव आज भी खबरों में है।
[यह भी पढ़ें: भारत का रक्षा बजट 2025: चीन और पाकिस्तान को इससे क्या संदेश मिला?]
भारत-पाक तनाव के बावजूद संवाद के रास्ते क्यों खुले हैं?
तथ्यों से तीन बातें दिखती हैं।
पहली, अध्यक्षता अब पाकिस्तान के पास है। एससीओ की बैठकें उसी के यहां होंगी। भारत-पाक तनाव के बावजूद भारत के इनमें शामिल होने की उम्मीद है।
दूसरी, इस मंच पर रूस और चीन जैसे देश भी हैं। भारत इस संगठन से जुड़ा हुआ है। मोदी पिछले दो शिखर सम्मेलनों में गए: अगस्त 2025 में तियानजिन और अगस्त 2026 में बिश्केक।
तीसरी, फैसले खुले हैं। विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा कि 2027 में मोदी की भागीदारी पर फैसला उचित समय पर, उचित स्तर पर होगा। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, मौजूदा रिश्तों में ऐसी यात्रा मुश्किल दिखती है।
पहले की यात्राएं क्या बताती हैं?
अक्टूबर 2024 में जयशंकर एससीओ सम्मेलन के लिए इस्लामाबाद गए थे। दिसंबर 2015 में सुषमा स्वराज के बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की यह पहली पाकिस्तान यात्रा थी।
25 दिसंबर 2015 को मोदी अफगानिस्तान से लौटते समय अचानक लाहौर पहुंचे। वे तब के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिले। एक हफ्ते बाद, 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हमला हुआ। सितंबर 2016 में उरी हमला हुआ। इनसे रिश्ते और बिगड़ गए। इतिहास में भारत-पाक तनाव के बीच बातचीत की कोशिशें हुई हैं। पर हमलों ने माहौल बिगाड़ा।
दोनों देशों का रुख क्या है?
भारत आतंकवाद पर सख्त है। पीआईबी की जानकारी के अनुसार, सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन भरोसे के साथ और हमेशा के लिए नहीं छोड़ता। कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को भारत नहीं मानता।
भारत-पाक तनाव पर पाकिस्तान अलग बात कहता है। फॉरेन पॉलिसी के अनुसार, वह कश्मीर पर वैश्विक मध्यस्थता चाहता है। वह सिंधु संधि के मुद्दे पर दुनिया का समर्थन भी मांगता है। अपनी जमीन पर आतंकवाद के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप भी लगाता है। यानी भारत-पाक तनाव अब कूटनीति का मैदान भी है।
[यह भी पढ़ें: ईरान मक्का डिफेंस पैक्ट: पाकिस्तान हूथी विद्रोहियों से क्यों नहीं भिड़ रहा? जानिए 4 बड़ी वजहें]
भारत-पाक तनाव का आम लोगों पर क्या असर पड़ा?
भारत-पाक तनाव का सबसे सीधा असर व्यापार और वीजा पर पड़ा। अटारी बॉर्डर बंद हुआ। हवाई क्षेत्र भी बंद किए गए। इससे यात्रियों और कारोबारियों पर असर पड़ा। ताजा स्थिति के लिए विदेश मंत्रालय की वेबसाइट देखें।
आगे क्या हो सकता है?
भारत-पाक तनाव के बीच अगस्त 2027 तक एससीओ की कई बैठकें होंगी। इस रिपोर्ट के समय तक द्विपक्षीय बातचीत की कोई आधिकारिक घोषणा हमारे देखने में नहीं आई। इन बातों पर नजर रखें:
- बैठक के बाद आधिकारिक बयान
- विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग
- अगली बैठकों में भारत की भागीदारी का स्तर
भारत-पाक तनाव की दिशा इन्हीं संकेतों से समझ आएगी।
निष्कर्ष: क्या भारत-पाक तनाव कम होगा?
इस्लामाबाद में भारतीय राजनयिकों की मौजूदगी बहुपक्षीय बैठक का हिस्सा है। यह द्विपक्षीय बातचीत की शुरुआत नहीं है। पर भारत ने इस मंच से दूरी भी नहीं बनाई। भारत-पाक तनाव अभी कायम है। सिंधु जल संधि, व्यापार और वीजा के मुद्दे जस के तस हैं। भारत-पाक तनाव की अगली तस्वीर आने वाले आधिकारिक फैसलों पर टिकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत-पाक तनाव के बीच भारतीय राजनयिक इस्लामाबाद क्यों गए?
वे एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक में गए हैं। यह बहुपक्षीय बैठक है। इसका भारत-पाक तनाव से सीधा संबंध नहीं है।
2. क्या भारत और पाकिस्तान की बातचीत शुरू हो गई है?
नहीं। रिपोर्ट में इसे द्विपक्षीय वार्ता नहीं बताया गया। भारत-पाक तनाव के बीच दोनों देश सिर्फ एक संगठन की बैठक में हैं।
3. यह बैठक कितने दिन चलेगी?
तीन दिन। यह 28 सितंबर 2026 को शुरू हुई। इसमें पाकिस्तान की अध्यक्षता के कार्यक्रम और आगे की बैठकों की तैयारी पर चर्चा होगी।
4. क्या मोदी 2027 में पाकिस्तान जाएंगे?
अभी तय नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फैसला उचित समय पर होगा। भारत-पाक तनाव को देखते हुए ऐसी यात्रा मुश्किल मानी जा रही है।
5. भारत-पाक तनाव का ताजा दौर कब शुरू हुआ?
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद। इसके बाद सिंधु संधि स्थगित हुई और ऑपरेशन सिंदूर हुआ। भारत-पाक तनाव तब से बना है।
Research & Analysis by Swati Sharma
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