BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन-शी जिनपिंग की महामुलाकात के मायने, और आम इंसान पर इसका असर

Sep 11, 2026
(0)

दिल्ली की सड़कें आजकल कुछ अलग ही नजर आ रही हैं। हर तरफ सुरक्षा घेरा है, वीआईपी काफिले हैं, और पूरी दुनिया की नजर एक ही जगह टिकी है। वजह है BRICS Summit 2026, जिसमें पुतिन, शी जिनपिंग और मोदी एक साथ मंच साझा करने वाले हैं। यह मुलाकात सिर्फ फोटो के लिए नहीं है। इसका असर सीधा आपकी जेब तक पहुंच सकता है। आइए, हर पहलू को बारीकी से समझते हैं।

 

 

कब और कहां हो रहा है यह सम्मेलन?

BRICS Summit 2026, यानी 18वां BRICS सम्मेलन, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा है। इसका वेन्यू है भारत मंडपम, जो प्रगति मैदान में स्थित है। यह वही जगह है जहां पहले भी G20 जैसे बड़े आयोजन हो चुके हैं।
भारत इस साल BRICS की चेयरशिप संभाल रहा है, और यह भारत का चौथा मौका है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी यह ज़िम्मेदारी निभा चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चेयरशिप संभाली थी, और तभी से देशभर में तैयारियां शुरू हो गई थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की इस चेयरशिप के दौरान 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
 

BRICS की शुरुआत कैसे हुई थी?

BRICS Summit 2026 को समझने से पहले इसकी पृष्ठभूमि जानना ज़रूरी है। यह समूह पहले सिर्फ "BRIC" कहलाता था, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। इसकी पहली विदेश मंत्री स्तर की बैठक 2006 में न्यूयॉर्क में हुई थी, और पहला औपचारिक सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में हुआ। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद यह समूह "BRICS" बन गया।
पिछले कुछ सालों में यह समूह और भी बड़ा हो गया है। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी इसमें शामिल हुए। आज BRICS में कुल 11 पूरे सदस्य देश हैं, और यह दुनिया की करीब 49 प्रतिशत आबादी और 40 प्रतिशत ग्लोबल जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। यही वजह है कि BRICS Summit 2026 को इतना अहम माना जा रहा है।
 

किन-किन देशों के नेता आ रहे हैं?

BRICS अब सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं रहा। इसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, इंडोनेशिया और यूएई भी शामिल हैं।
शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आ रहे हैं, और चीन ने कुछ दिनों की खामोशी के बाद आखिरकार उनकी यात्रा की पुष्टि कर दी। पुतिन तीन दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंच चुके हैं, और मोदी के साथ उनकी अलग से द्विपक्षीय बातचीत भी हो रही है, जिसमें व्यापार, ऊर्जा और रक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इनके अलावा इन नेताओं की मौजूदगी भी अहम है:

ब्राज़ील की तरफ से इस बार खुद राष्ट्रपति नहीं, बल्कि विदेश मंत्री मौरो विएरा शिरकत कर रहे हैं।

 

 

दो दिन का पूरा कार्यक्रम क्या है?

BRICS Summit 2026 से एक दिन पहले, यानी 11 सितंबर को, दिल्ली में BRICS बिज़नेस फोरम हुआ, जिसमें पीएम मोदी, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अहम बातें रखीं। पुतिन ने भी इस फोरम की प्लेनरी सेशन में हिस्सा लिया।
12 सितंबर को औपचारिक सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत की चेयरशिप के तहत हुए कामों पर चर्चा होगी। 13 सितंबर को व्यापक स्तर पर सभी सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आमंत्रित देशों के नेता शामिल होंगे। इस दिन सुबह नेताओं की ग्रुप फोटो होगी, इसके बाद मुख्य सत्र "Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth" शीर्षक से आयोजित होगा। सम्मेलन का समापन "न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन" के साथ होगा, जिसमें सभी देशों की सहमति वाले मुद्दे शामिल किए जाएंगे।
 

इस साल का थीम और चार मुख्य स्तंभ क्या हैं?

BRICS Summit 2026 का थीम है "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability"। इसे प्रधानमंत्री मोदी की "Humanity First" सोच से प्रेरणा मिली है।
इस थीम को चार स्तंभों में बांटा गया है:
 

स्तंभफोकस क्षेत्र
Resilienceनई तकनीक, एआई और डिजिटल समाधान
Cooperationव्यापार, निवेश और नीति समन्वय
Sustainabilityजलवायु कार्रवाई, ऊर्जा परिवर्तन, हरित वित्त

 

किन क्षेत्रों में ठोस काम हुआ है?

भारत की चेयरशिप के दौरान कई क्षेत्रों में ठोस पहल हुई हैं, जो BRICS Summit 2026 में औपचारिक रूप से सामने आएंगी।

  • व्यापार: BRICS Global Value Chains Action Plan 2026-2030 को अपनाया गया है, जो छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए ट्रेड फाइनेंस को आसान बनाएगा।
  • कृषि: डिजिटल और रीजेनरेटिव कृषि पर नए नेटवर्क बनाए गए हैं, जिसमें एआई और जियोस्पेशियल तकनीक शामिल होगी।
  • सीमा शुल्क: BRICS Authorised Economic Operator (AEO) Action Plan 2026 को लागू करने पर सहमति बनी है।
  • ऊर्जा: एनर्जी स्टोरेज और स्मार्ट ग्रिड पर नए दिशा-निर्देश और एक डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लॉन्च किया गया है।
  • परिवहन: BRICS Railway Research Network और Urban Mobility Hub जैसी पहलें शुरू हुई हैं।

क्या यह डॉलर के लिए चुनौती है?

यह सवाल हर जगह पूछा जा रहा है। BRICS देश लंबे समय से आपसी व्यापार में अपनी-अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल की बात कर रहे हैं। अमेरिका की टैरिफ नीतियों ने इस दिशा में और दबाव बनाया है। भारत ने इस बार एक "BRICS इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म" का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि छोटे व्यापारियों को व्यापार वित्त में आसानी हो।
लेकिन सच यह भी है कि सदस्य देशों के बीच कई मतभेद हैं। इसलिए एक साझा मुद्रा या डॉलर से पूरी तरह दूरी अभी दूर की बात लगती है।
(यह भी पढ़ सकते हैं: भारत रूस मित्रता: पश्चिम की ईर्ष्या, भारत की आवश्यकता)
 

सुरक्षा के इंतजाम कितने बड़े हैं?

इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी के लिए सुरक्षा भी उतनी ही सख्त है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक करीब 15,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां तैनात की गई हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, करीब 16 राष्ट्राध्यक्ष इस सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं, जिनमें से कई को हाई-लेवल सुरक्षा की ज़रूरत है।
शी जिनपिंग और पुतिन की सुरक्षा के लिए चीन और रूस की विशेष टीमें भी दिल्ली पहुंच चुकी हैं, जो होटलों और यात्रा मार्गों पर भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को शी जिनपिंग की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दी गई है। होटलों, हवाई अड्डों और भारत मंडपम के आसपास कई परतों में सुरक्षा घेरा बनाया गया है, जिसमें एंटी-ड्रोन उपाय भी शामिल हैं। ट्रैफिक पाबंदियां 10 सितंबर से 14 सितंबर तक लागू रहेंगी।
सम्मेलन पर कुल खर्च का कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया है। कुछ छोटे सरकारी टेंडर दस्तावेज़ों से BRICS Summit 2026 से जुड़ी आंशिक जानकारी सामने आई है, जैसे भोपाल में हुई एक प्रदर्शनी और दिल्ली में सुंदरीकरण से जुड़े काम, लेकिन पूरा बजट अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
 

क्या सब कुछ इतना आसान है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। इस सम्मेलन के पीछे कई तनाव भी छिपे हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट, खासकर ईरान से जुड़े हालात, और यूक्रेन युद्ध इस बैठक को मुश्किल बना सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गल्फ क्षेत्र का तनाव इस बार सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।
मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से होने वाली मुलाकात पर भी सबकी नज़र है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में भारत-चीन रिश्तों में थोड़ी नरमी आई है। यह मुलाकात आने वाले सालों की कूटनीति की दिशा तय कर सकती है।
(यह भी पढ़ सकते हैं: भारत की जी20 नेतृत्व क्षमता: वैश्विक दक्षिण की आवाज़ या महज़ एक अच्छी मार्केटिंग रणनीति?)
 

भारत के लिए यह मौका कितना अहम है?

BRICS Summit 2026 भारत के लिए सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि दुनिया को अपनी ताकत दिखाने का मौका है। यह सम्मेलन भारत को वैश्विक कूटनीति के केंद्र के रूप में पेश करता है, खासकर तब जब भारत खुद को "ग्लोबल साउथ" यानी विकासशील देशों की आवाज़ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
BRICS बिज़नेस फोरम में बड़े कारोबारी नेताओं ने भी हिस्सा लिया, जिसमें व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर बात हुई। BRICS बिज़नेस काउंसिल के चेयरमैन जय श्रॉफ ने कहा कि रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी, ये चारों प्राथमिकताएं सरकार और कारोबार, दोनों के लिए अहम हैं।
 

आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?

यह सवाल सबसे ज़रूरी है। अगर व्यापार समझौते और आपसी भुगतान प्रणाली पर सहमति बनती है, तो इसका फायदा छोटे व्यापारियों और निर्यातकों को मिल सकता है। ऊर्जा सुरक्षा पर बात होने से ईंधन की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि रूस और सऊदी अरब जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देश भी इस समूह का हिस्सा हैं।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और एआई का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों को भी फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान और सीमा शुल्क में आसानी से जुड़े कदम छोटे व्यापारियों के लिए विदेश व्यापार को सरल बना सकते हैं। यानी BRICS Summit 2026 सिर्फ नेताओं की बैठक नहीं, बल्कि आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से भी जुड़ा हुआ है।
 

आखिर में

BRICS Summit 2026 सिर्फ एक कूटनीतिक आयोजन नहीं है। यह दुनिया के बदलते समीकरणों की एक झलक है। पुतिन, शी और मोदी का एक साथ आना अपने आप में एक बड़ा संकेत है, चाहे इनके बीच कितने भी मतभेद क्यों न हों। अगले दो दिनों में जो भी तय होगा, चाहे वह व्यापार से जुड़ा हो या ऊर्जा से, उसका असर सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी तक भी पहुंचेगा। न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन के बाद ही यह साफ होगा कि इस बड़ी मुलाकात से आखिर में निकला क्या।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. BRICS Summit 2026 कब और कहां हो रहा है?

यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है। इससे एक दिन पहले, 11 सितंबर को BRICS बिज़नेस फोरम भी आयोजित हुआ।

 

2. क्या शी जिनपिंग वाकई भारत आ रहे हैं? 

हां, चीन ने उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा है।

 

3. इस सम्मेलन का मुख्य विषय और उद्देश्य क्या है?

थीम है "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability"। इसमें व्यापार, कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य और जलवायु जैसे मुद्दों पर बात हो रही है।

 

4. क्या BRICS डॉलर की जगह ले सकता है?

फिलहाल यह मुश्किल लगता है। सदस्य देशों के बीच अभी भी कई मतभेद बने हुए हैं, हालांकि आपसी मुद्रा में व्यापार बढ़ाने पर काम जारी है।

 

5. सुरक्षा के लिए कितने जवान तैनात हैं? 

करीब 15,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां तैनात हैं। इसके अलावा चीन और रूस की विशेष सुरक्षा टीमें भी मौजूद हैं।
 

दुनिया की बड़ी खबरें और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम

विश्व राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, युद्ध, कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें पढ़ें।

लेखक एवं विश्लेषण

Swati Sharma

InfoSagar.in पर देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों, राजनीति, जियोपॉलिटिक्स, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, रक्षा, बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, रिसर्च और विश्लेषण प्रस्तुत किए जाते हैं।

169 बार देखा गया

यह भी पढ़ें

बांग्लादेश के 2 नागरिकों को सऊदी में फांसी, श्रीलंका ने कैसे बचाई जान? International Interest

बांग्लादेश के 2 नागरिकों को सऊदी में फांसी, श्रीलंका ने कैसे बचाई जान?

सऊदी अरब में बांग्लादेश के 2 नागरिकों को फांसी, ढाका को खबर तक नहीं! श्रीलंका ने दिखाया कैसे बचाई जाती है अपने नागरिक की जानSaudi …

पूरा लेख पढ़ें →
रूसी तेल पर अमेरिका का यू-टर्न: रुबियो बोले, भारत एक दिन में खरीद बंद नहीं कर सकता International Interest

रूसी तेल पर अमेरिका का यू-टर्न: रुबियो बोले, भारत एक दिन में खरीद बंद नहीं कर सकता

रूसी तेल पर अमेरिका का बड़ा बयान: मार्को रुबियो ने माना क्यों भारत नहीं रोक सकता रूस से तेल खरीदना!रूस से तेल खरीदने को लेकर …

पूरा लेख पढ़ें →
ईरान पर ‘Mother of All Bombs’ इस्तेमाल करेगा अमेरिका? MOAB और GBU-57 में अंतर International Interest

ईरान पर ‘Mother of All Bombs’ इस्तेमाल करेगा अमेरिका? MOAB और GBU-57 में अंतर

ईरान पर ‘Mother of All Bombs’ गिराएगा अमेरिका? ट्रंप की रणनीति, 2025 का हमला और एक और युद्ध का खतराअमेरिका के पास दुनिया के सबसे …

पूरा लेख पढ़ें →
ईरान और हूथी काट सकते हैं दुनिया का इंटरनेट? समुद्री केबलों पर खतरा International Interest

ईरान और हूथी काट सकते हैं दुनिया का इंटरनेट? समुद्री केबलों पर खतरा

ईरान और हूथी काट सकते हैं दुनिया का इंटरनेट कनेक्शन? समुद्र के नीचे बिछी केबलों पर मंडराता खतराकल्पना कीजिए कि आपके मोबाइल में इंटरनेट चल …

पूरा लेख पढ़ें →

टिप्पणियां

0
?