नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा: 7 अक्टूबर की चेतावनी का पूरा सच

Sep 28, 2026
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नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा: 7 अक्टूबर की चेतावनी से जुड़े विवाद का पूरा सच क्या है? 

पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अचानक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरे की जानकारी पहले से किसी को नहीं थी। नेतन्याहू ने अबू धाबी पहुंचकर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) से बंद कमरे में खास मुलाकात की है।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल की राजनीति में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले से जुड़ा एक नया विवाद गहरा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमले से ठीक 10-12 दिन पहले UAE के राष्ट्रपति ने खुद फोन करके नेतन्याहू को एक बड़े हमले की चेतावनी दी थी। इस अचानक हुई मुलाकात ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए समझते हैं कि  नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा क्यों हुआ और इस पूरे विवाद की सच्चाई क्या है।

 

 

अचानक क्यों हुआ नेतन्याहू का अबू धाबी दौरा? 

रविवार को बेंजामिन नेतन्याहू एक निजी विमान से अबू धाबी पहुंचे। उन्होंने वहां करीब चार घंटे का समय बिताया और  राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से बातचीत की। दोनों देशों के बीच साल 2020 में ' अब्राहम एकॉर्ड ' के तहत औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए थे।

हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच हुए तनाव और सुरक्षा हालातों के बीच यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। हालांकि, इस दौरे का मुख्य केंद्र 7 अक्टूबर के हमले से जुड़ी चेतावनी का विवाद ही बना हुआ है।

(यह भी पढ़ें:  अमेरिका ईरान युद्धविराम: दोस्ती की असली परीक्षा वाशिंगटन इज़राइल के बीच ) 

 

7 अक्टूबर की चेतावनी से जुड़ा पूरा विवाद क्या है? 

इजरायल के प्रमुख समाचार पत्र 'हारेत्ज़' की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हुए भयानक हमास हमले से लगभग 10 से 12 दिन पहले UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने नेतन्याहू को फोन किया था।

  • चेतावनी का दावा: रिपोर्ट के मुताबिक, UAE के राष्ट्रपति को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि हमास का नेता याह्या सिनवार एक बड़े ऑपरेशन (जिसका कोडनेम 'ज़िलज़ाल' या भूकम्प था) की योजना बना रहा है।
  • लापरवाही का आरोप: इस रिपोर्ट में कहा गया कि MBZ ने नेतन्याहू को सतर्क रहने को कहा था, लेकिन नेतन्याहू ने यह महत्वपूर्ण जानकारी अपनी सेना या खुफिया एजेंसी को नहीं सौंपी।
  • विपक्ष का हमला:   इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस खुलासे के बाद नेतन्याहू पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर इस चेतावनी को गंभीरता से लिया जाता, तो इतने बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

 

पीएम नेतन्याहू का पक्ष: क्या आरोपों में कोई सच्चाई है? 

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

  • आरोपों से इनकार: नेतन्याहू के कार्यालय का कहना है कि उन्हें 7 अक्टूबर के हमले से पहले UAE के राष्ट्रपति से ऐसा कोई विशेष इंटेलिजेंस इनपुट या चेतावनी नहीं मिली थी।
  • कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: नेतन्याहू ने इस खबर को पूरी तरह से झूठा और भ्रामक बताते हुए संबंधित अखबार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।
  • राजनीतिक मोड़: इजरायल में आगामी चुनावों को देखते हुए नेतन्याहू के समर्थकों का कहना है कि यह उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की एक राजनीतिक साजिश है।

 

इस मुद्दे पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का क्या कहना है? 

UAE प्रशासन ने हमेशा की तरह इस विवादित रिपोर्ट पर कोई सीधा या आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

हालांकि, UAE के कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार:

  • सीधी बातचीत का माध्यम: इजरायल और UAE के बीच सीधे और खुले संचार माध्यम उपलब्ध हैं।
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: सुरक्षा और खुफिया से जुड़ी जानकारियां आमतौर पर दोनों देशों की संबंधित सुरक्षा एजेंसियों द्वारा साझा की जाती हैं, न कि सीधे देश के सर्वोच्च राजनीतिक प्रमुखों के स्तर पर।
  • मजबूत संबंध: इस विवाद के बावजूद, दोनों देशों ने यह साफ किया है कि उनके बीच द्विपक्षीय रिश्ते और रणनीतिक साझेदारी पूरी तरह सुरक्षित है।

     

 

ईरान युद्ध और इजरायल-UAE की बढ़ती रक्षा साझेदारी 

इस विवाद के बीच  नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा यह भी दर्शाता है कि दोनों देशों के रक्षा रिश्ते कितने मजबूत हो चुके हैं। हाल ही में ईरान के साथ बढ़े सैन्य तनाव के दौरान इजरायल ने UAE को अपनी प्रसिद्ध 'आयरन डोम' एयर डिफेंस प्रणाली की एक इकाई अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई थी।

इसके अलावा, मध्य पूर्व में बढ़ते ड्रोन खतरों से निपटने के लिए भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

(यह भी पढ़ें:  आसमान का नया AK-47: क्यों दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ शाहेद ड्रोन को 'आधुनिक युद्ध का कलाश्निकोव' कह रहे हैं? )

 

निष्कर्ष 

नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा यह साबित करता है कि पश्चिम एशिया की राजनीति में पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है। एक तरफ जहां 7 अक्टूबर की चेतावनी को लेकर इजरायल के अंदर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इजरायल और UAE अपने रिश्तों को और मजबूत करने में लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि इस मुलाकात से मध्य पूर्व की शांति और राजनीति को क्या नई दिशा मिलती है।

 

7 अक्टूबर चेतावनी विवाद और UAE दौरे का सच: एक नज़र में 

मुख्य पहलू 

रिपोर्ट और तथ्य 

दौरे की तारीख और स्थान 

रविवार, अबू धाबी (UAE)

मुख्य मुलाकात 

इजरायली PM नेतन्याहू और UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद

विवाद का कारण 

7 अक्टूबर हमले से पहले कथित रूप से मिली UAE की चेतावनी न शेयर करना

नेतन्याहू का स्टैंड 

दावों को झूठा बताया और कानूनी कार्रवाई की बात कही

रक्षा सहयोग 

एयर डिफेंस और क्षेत्रीय सुरक्षा पर दोनों देशों की सहमति

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

1. नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा क्यों आयोजित किया गया? 

नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के खतरे और हाल ही में उभरे कूटनीतिक विवादों पर सीधे बातचीत करने के लिए आयोजित किया गया था।

 

2. क्या UAE के राष्ट्रपति ने 7 अक्टूबर के हमले से पहले इजरायल को चेतावनी दी थी? 

इजरायली अखबार 'हारेत्ज़' का दावा है कि UAE राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस दावे का पूरी तरह से खंडन किया है।

 

3. क्या इस विवाद से इजरायल और UAE के संबंधों पर असर पड़ा है? 

नहीं, दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि उनके बीच अब्राहम एकॉर्ड के तहत बने कूटनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत बने हुए हैं।

 

4. नेतन्याहू का अचानक UAE दौरा कितने समय का था? 

यह एक बेहद संक्षिप्त दौरा था, जिसमें नेतन्याहू ने अबू धाबी में लगभग चार घंटे बिताए और फिर इजरायल लौट आए।

 

5. इस पूरी घटना पर इजरायल के विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया है? 

इजरायल के विपक्षी नेताओं ने चेतावनी को नजरअंदाज करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है और सुरक्षा में हुई चूक के लिए नेतन्याहू से जवाब मांगा है।

 

 

Research & Analysis by Swati Sharma

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