पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से आया है। शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने अपने आतंकवादियों पर काबू नहीं पाया होता, तो वे आज न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते। यह बयान सुनकर हर कोई हैरान रह गया। सवाल यह उठता है कि क्या शहबाज शरीफ खुद अपने देश का सच बता रहे हैं, या फिर यह सिर्फ एक और बहाना है।
कब और कहाँ दिया गया यह बयान?
यह घटना 22 सितंबर 2026 की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे थे। यहीं मंच से शहबाज शरीफ ने यह बयान दिया। उनके शब्द थे - "अगर हमने अपने आतंकवादियों पर काबू नहीं पाया होता, तो वे न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते।" यह बात सुनते ही कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान को दुनिया भर में वैश्विक आतंकवाद के सबसे बड़े केंद्रों में से एक माना जाता है। ऐसे में शहबाज शरीफ का यह दावा कई सवाल खड़े करता है। यह आत्म-प्रशंसा वाला बयान माना जा रहा है।
न्यूयॉर्क में शहबाज शरीफ का स्वागत कैसा रहा?
शहबाज शरीफ के इस दौरे की शुरुआत ही विवादों से हुई। न्यूयॉर्क पहुंचते ही उन्हें भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए कोई रेड कार्पेट नहीं बिछाया गया। अमेरिका का कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी भी उनका स्वागत करने नहीं पहुंचा। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने ही उनका स्वागत किया।
इसके बाद न्यूयॉर्क की सड़कों पर भी शहबाज शरीफ को विरोध का सामना करना पड़ा। सड़कों पर उनकी तस्वीर के साथ "चोर आया, चोर आया" और "चेरी पॉलिश" लिखे पोस्टर देखे गए। PTI समर्थकों ने भी उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पाकिस्तान की एक और वैश्विक बेइज्जती के रूप में देखा।
पाकिस्तान का आतंकवाद से पुराना नाता
शहबाज शरीफ भले ही यह दावा करें कि उनका देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन तथ्य कुछ और ही कहानी बताते हैं। पाकिस्तान का आतंकवाद से नाता दशकों पुराना है। दुनिया कई मौकों पर यह देख चुकी है।
साल 2008 में मुंबई पर 26/11 का आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 160 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। इस हमले की साजिश पाकिस्तान की धरती से रची गई थी। इस हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है। संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है।
इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर भी पाकिस्तान में सुरक्षित रहता आया है। मसूद अजहर को भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आतंकवादी घोषित किया है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने कभी भी इन आतंकवादियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की।
पाकिस्तान को इसी वजह से 2018 से 2022 तक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में रखा गया था। यह वित्तीय निगरानी संस्था आतंकवाद की फंडिंग रोकने का काम करती है। इस लिस्ट में रहने का मतलब है कि पाकिस्तान आतंकवाद की फंडिंग रोकने में नाकाम रहा है।
क्या शहबाज शरीफ का बयान दोहरा मापदंड है?
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शहबाज शरीफ का यह बयान पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। एक तरफ पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है। दूसरी तरफ, वह अपनी धरती पर आतंकवादियों को पनाह, फंडिंग और प्रशिक्षण भी देता आया है।
सोशल मीडिया पर वैश्विक रणनीतिक विशेषज्ञों ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जो देश खुद दशकों से आतंकियों को पनाह देते रहे हैं, अगर वे खुद को आतंकवाद का रक्षक बताएं, तो यह पूरी दुनिया की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर शहबाज शरीफ के बयान की तरफ इशारा करती है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक दबाव और गिरती साख को बचाने के लिए ही शहबाज शरीफ ऐसे बयान दे रहे हैं। इसका मकसद दुनिया का ध्यान पाकिस्तान में पल रहे आतंकी ढांचे से हटाना है।
भारत का रुख इस मामले पर क्या है?
भारत हमेशा से यह कहता आया है कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हथियार बनाता है। भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह साबित किया है कि पाकिस्तान की धरती से आतंकी गतिविधियां संचालित होती हैं।
भारत की नीति साफ है - जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से चलने वाले आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। शहबाज शरीफ के इस ताजा बयान ने भारत के इस रुख को एक बार फिर सही साबित कर दिया है।
रक्षा के मोर्चे पर भी भारत लगातार अपनी तैयारियां मजबूत करता रहा है (भारत का रक्षा बजट 2025: चीन और पाकिस्तान को इससे क्या संदेश मिला? - यह भी पढ़ सकते हैं)। यह दिखाता है कि भारत सीमा पार से आने वाले खतरों को लेकर कितना सतर्क है।
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की छवि
शहबाज शरीफ के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर पाकिस्तान की छवि पर सवाल उठे हैं। दुनिया अब यह समझ चुकी है कि पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता है, लेकिन असलियत में वह इसका सबसे बड़ा जनक रहा है।
कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देना यह साबित करता है कि पाकिस्तान अपनी पुरानी आदतों से अभी तक बाज नहीं आया है। यह भी गौर करने वाली बात है कि वैश्विक राजनीति में तनाव और संधि दोनों साथ-साथ चलते हैं (अमेरिका ईरान युद्धविराम: दोस्ती की असली परीक्षा वाशिंगटन इज़राइल के बीच - यह भी पढ़ सकते हैं), जहां हर बयान का असर कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ता है।
आगे क्या होगा?
शहबाज शरीफ 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे उस मंच से आतंकवाद पर क्या रुख अपनाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पाकिस्तान पर आतंकवाद के खात्मे के लिए और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
निष्कर्ष
शहबाज शरीफ का यह बयान सिर्फ एक बयान नहीं है। यह पाकिस्तान की उस पुरानी नीति की झलक है, जिसमें आतंकवाद को नकारना और खुद को पीड़ित बताना शामिल है। लेकिन तथ्य इसके उलट कहानी बताते हैं। हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों का पाकिस्तान में सुरक्षित रहना ही इस बात का सबूत है। शहबाज शरीफ चाहे जो भी दावा करें, दुनिया अब पाकिस्तान की असली तस्वीर समझ चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. शहबाज शरीफ ने न्यूयॉर्क-लंदन को लेकर क्या बयान दिया?
शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने अपने आतंकवादियों पर काबू नहीं पाया होता, तो वे आज न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते।
2. यह बयान कहां दिया गया था?
यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में दिया गया।
3. न्यूयॉर्क में शहबाज शरीफ का स्वागत कैसा रहा?
शहबाज शरीफ को न्यूयॉर्क में भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर कोई बड़ा स्वागत नहीं हुआ और सड़कों पर उनके खिलाफ पोस्टर लगे देखे गए।
4. पाकिस्तान का आतंकवाद से क्या इतिहास रहा है?
पाकिस्तान की धरती से 26/11 मुंबई हमले जैसी घटनाएं संचालित हुई हैं। हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे संयुक्त राष्ट्र-घोषित आतंकवादी आज भी पाकिस्तान में रहते हैं।
5. इस बयान पर भारत का क्या रुख है?
भारत का रुख साफ है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, तब तक बातचीत संभव नहीं है। भारत इसे शहबाज शरीफ के दोहरे मापदंड का सबूत मानता है।