India Second Largest Mobile Manufacturer: भारत मोबाइल निर्माण में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश कैसे बना? जानिए आंकड़े, कारण और भविष्य

Oct 12, 2026
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भारत अब सिर्फ मोबाइल फोन खरीदने वाला बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि दुनिया के प्रमुख मोबाइल निर्माण केंद्रों में भी शामिल हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में देश में मोबाइल फोन बनाने की क्षमता तेजी से बढ़ी है। आज भारत में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश मोबाइल फोन देश के भीतर ही बनाए जाते हैं और भारतीय कारखानों में तैयार स्मार्टफोन दुनिया के दूसरे देशों में भी भेजे जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियान के बीच यह उपलब्धि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

लेकिन इस सफलता की असली कहानी क्या है? भारत मोबाइल निर्माण में दूसरे स्थान पर कैसे पहुँचा? क्या भारत के पास मोबाइल के सभी जरूरी पार्ट्स बनाने की क्षमता भी है? और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र से युवाओं तथा भारतीय कंपनियों को क्या लाभ मिल सकता है?

आइए, आंकड़ों, सरकारी नीतियों और भविष्य की संभावनाओं को आसान भाषा में समझते हैं।

 

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता

 

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014–15 में देश में मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग ₹18,000 करोड़ था। वित्त वर्ष 2025–26 तक यह बढ़कर करीब ₹6.27 लाख करोड़ हो गया।

इसका मतलब है कि भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन शुरुआती स्तर की तुलना में लगभग 33 गुना बढ़ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जारी जानकारी के अनुसार, भारत अब उत्पादन की मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है। देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में निर्मित किए जाते हैं। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ साल पहले तक भारत मोबाइल फोन के आयात पर काफी निर्भर था। अब देश में बड़े पैमाने पर मोबाइल बनाए जा रहे हैं और उनका निर्यात भी बढ़ रहा है। यहाँ एक बात समझना जरूरी है: दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता होने का मतलब उत्पादन की मात्रा के आधार पर अग्रणी देशों में शामिल होना है। इसका यह अर्थ नहीं है कि मोबाइल के प्रत्येक पार्ट या तकनीक में भारत पहले से आत्मनिर्भर हो गया है।

 

भारत में मोबाइल निर्माण के आंकड़े क्या कहते हैं?

भारत की प्रगति को समझने का सबसे आसान तरीका पिछले वर्षों के आंकड़ों की तुलना करना है।

क्षेत्रवित्त वर्ष 2014–15वित्त वर्ष 2025–26
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादनलगभग ₹1.9 लाख करोड़लगभग ₹13.11 लाख करोड़
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातलगभग ₹38,000 करोड़लगभग ₹4.24 लाख करोड़
मोबाइल फोन उत्पादनलगभग ₹18,000 करोड़लगभग ₹6.27 लाख करोड़
मोबाइल फोन निर्यातलगभग ₹1,500 करोड़लगभग ₹2.59 लाख करोड़

स्रोत: भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबंधित जुलाई 2026 की जारी जानकारी। आंकड़े लगभग हैं।

 

इन आंकड़ों से साफ दिखाई देता है कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र केवल घरेलू मांग पर निर्भर नहीं है। देश में बनने वाले उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रहे हैं। मोबाइल फोन के निर्यात में हुई वृद्धि खास तौर पर महत्वपूर्ण है। जब कोई देश बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, तो उसे विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने, गुणवत्ता बनाए रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलता है।

 

मोबाइल निर्माण में भारत की सफलता के पीछे क्या कारण हैं?

1. Make in India अभियान

 

भारत में मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देने के पीछे एक बड़ा उद्देश्य देश के भीतर उत्पादन क्षमता विकसित करना रहा है। पहले भारत में बिकने वाले कई मोबाइल फोन विदेशों से आयात किए जाते थे। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कंपनियों को भारत में फैक्ट्रियाँ लगाने, उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे भारत में मोबाइल असेंबली और बड़े पैमाने पर निर्माण का विस्तार हुआ। साथ ही, मोबाइल कंपनियों को भारतीय बाजार के करीब उत्पादन करने का अवसर मिला। हालाँकि, उत्पादन बढ़ाने में केवल सरकारी नीतियों की भूमिका नहीं रही। भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार, कंपनियों का निवेश, श्रमिकों की उपलब्धता और वैश्विक कंपनियों की व्यावसायिक रणनीतियाँ भी महत्वपूर्ण रही हैं।

 

2. Production Linked Incentive यानी PLI योजना

 

मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में Production Linked Incentive (PLI) योजना को एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल माना जाता है। इस योजना का उद्देश्य पात्र कंपनियों को भारत में अतिरिक्त उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन देना था। इसके तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली कंपनियों को उनके पात्र उत्पादन और बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन मिल सकते थे। इस तरह की नीतियों ने कंपनियों को भारत में अपनी निर्माण क्षमता बढ़ाने और निर्यात के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। सरकार के फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, मोबाइल फोन उत्पादन वित्त वर्ष 2019–20 के लगभग ₹2.14 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 में करीब ₹5.5 लाख करोड़ हो गया था। PLI योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई। इसके बाद मोबाइल निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी गई।

 

3. बड़ी कंपनियों का भारत में निवेश

 

मोबाइल निर्माण उद्योग में बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए आधुनिक फैक्ट्रियों, मशीनों, प्रशिक्षित कर्मचारियों और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत होती है। भारत में मोबाइल ब्रांडों और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी ने इस क्षेत्र को विस्तार दिया है। Apple के iPhone उत्पादन से जुड़ी कंपनियों और Samsung जैसे बड़े ब्रांडों की भारतीय निर्माण गतिविधियों ने भारत को वैश्विक मोबाइल सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण बनाया है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी ब्रांड का मोबाइल भारत में बनना और उस ब्रांड का भारतीय कंपनी होना दो अलग बातें हैं। भारत में विदेशी ब्रांडों के फोन बनाने से घरेलू उत्पादन और रोजगार बढ़ सकते हैं, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि उस ब्रांड की तकनीक या पूरी सप्लाई चेन भारत के नियंत्रण में है।

 

4. भारत का विशाल घरेलू बाजार

 

भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन उपभोक्ता बाजारों में शामिल है। यहाँ अलग-अलग आय वर्गों के लोग स्मार्टफोन खरीदते हैं और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल बैंकिंग, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शिक्षा और ई-कॉमर्स जैसी सेवाओं के विस्तार से स्मार्टफोन की उपयोगिता बढ़ी है। इतने बड़े बाजार में मौजूदगी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यदि किसी कंपनी को भारत में मजबूत मांग मिलती है, तो उसके लिए देश में उत्पादन और वितरण का नेटवर्क विकसित करना व्यावसायिक रूप से आकर्षक हो सकता है।

 

5. बेहतर औद्योगिक ढाँचा और सप्लाई चेन

 

मोबाइल फोन बनाने के लिए केवल एक असेंबली लाइन पर्याप्त नहीं होती। इसमें डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा मॉड्यूल, चिप, सर्किट बोर्ड, कनेक्टर, सेंसर और कई अन्य घटकों की जरूरत होती है। जब किसी देश में बड़ी संख्या में मोबाइल बनते हैं, तो इन घटकों के आपूर्तिकर्ताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए भी नए अवसर पैदा होते हैं। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और घटक निर्माण को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं का उद्देश्य इसी तरह के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

 

क्या भारत अब मोबाइल के सभी पार्ट्स खुद बनाता है?

 

यह इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन तेजी से बढ़ा है, लेकिन तैयार मोबाइल बनाने और उसके सभी महत्वपूर्ण घटक देश में ही बनाने के बीच बड़ा अंतर है।

 

मोबाइल फोन की अंतिम असेंबली में कई तैयार या आयातित घटकों को जोड़कर पूरा उत्पाद बनाया जा सकता है। इसके विपरीत, सेमीकंडक्टर चिप, उन्नत डिस्प्ले, कैमरा सेंसर और अन्य जटिल घटकों का निर्माण करने के लिए अलग स्तर की तकनीक, निवेश, विशेषज्ञता और औद्योगिक सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए उत्पादन के बड़े आंकड़ों को देखते हुए यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत मोबाइल निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। भारत के सामने अब अगला लक्ष्य घरेलू स्तर पर अधिक घटकों का निर्माण करना, स्थानीय मूल्यवर्धन बढ़ाना और डिजाइन तथा अनुसंधान में अपनी क्षमता विकसित करना है। सरकारी स्तर पर घोषित योजनाओं में भी इस दिशा पर जोर दिया गया है। यदि भारत मोबाइल के अधिक महत्वपूर्ण घटक देश में बनाने में सफल होता है, तो इससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

 

मोबाइल फोन का निर्यात भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

 

मोबाइल फोन का निर्यात बढ़ना भारत की औद्योगिक प्रगति का एक अहम संकेत है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत से मोबाइल फोन का निर्यात लगभग ₹2.59 लाख करोड़ तक पहुँच गया। यह वित्त वर्ष 2014–15 के लगभग ₹1,500 करोड़ के स्तर से बहुत बड़ी वृद्धि है।

निर्यात बढ़ने से देश को कई तरह के लाभ हो सकते हैं:

  • विदेशी मुद्रा की कमाई: दूसरे देशों में मोबाइल बेचने से भारत को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
  • रोजगार: फैक्ट्रियों, पैकेजिंग, गुणवत्ता जाँच, परिवहन और सप्लाई चेन में काम के अवसर बढ़ सकते हैं।
  • वैश्विक बाजार में पहचान: भारतीय निर्माण इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम करने और गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
  • सहायक उद्योगों का विकास: मोबाइल निर्माण के लिए आवश्यक घटकों, मशीनों और सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।

स्मार्टफोन का निर्यात भारत के व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार की मार्च 2026 की रिपोर्ट में बताया गया था कि कैलेंडर वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी व्यक्तिगत निर्यात उत्पाद श्रेणी बनकर उभरे।

इससे पता चलता है कि मोबाइल फोन अब केवल घरेलू उपभोग की वस्तु नहीं हैं, बल्कि भारत के निर्यात क्षेत्र का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहे हैं।

 

भारत में मोबाइल निर्माण से कितने रोजगार पैदा हो सकते हैं?

 

मोबाइल निर्माण उद्योग रोजगार के कई प्रकार के अवसर पैदा कर सकता है। इसमें केवल फोन जोड़ने वाले कर्मचारी ही नहीं, बल्कि मशीन ऑपरेटर, इंजीनियर, गुणवत्ता जाँच विशेषज्ञ, वेयरहाउस कर्मचारी, सप्लाई चेन प्रबंधक और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इसके अलावा, मोबाइल निर्माण से जुड़ी सहायक कंपनियों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार ने जुलाई 2026 में घोषित नई मोबाइल फोन निर्माण योजना के तहत लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई है। यह योजना की अवधि के लिए घोषित अपेक्षित परिणाम है, न कि पहले से पैदा हो चुकी नौकरियों की संख्या। युवाओं के लिए इस क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक स्वचालन, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन प्रबंधन जैसे कौशल सीखना उपयोगी हो सकता है। फिर भी, वास्तविक रोजगार की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी कंपनियाँ निवेश करती हैं, उत्पादन कितना बढ़ता है और नई फैक्ट्रियों में किस तरह की तकनीक इस्तेमाल की जाती है।

 

सरकार की नई ₹62,500 करोड़ की मोबाइल निर्माण योजना क्या है?

 

15 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को ₹62,500 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ मंजूरी दी। इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक, यानी पाँच वर्ष निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य केवल मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारत में घरेलू मूल्यवर्धन, सप्लाई चेन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भारतीय ब्रांडों की क्षमता को भी मजबूत करना है।

 

योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • भारत में मोबाइल फोन के उत्पादन को आगे बढ़ाना।
  • महत्वपूर्ण घटकों और सब-असेंबली के घरेलू स्रोतों को प्रोत्साहित करना।
  • भारतीय कंपनियों को अपने ब्रांड विकसित करने में मदद देना।
  • डिजाइन, अनुसंधान और विकास यानी R&D को बढ़ावा देना।
  • वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत करना।

सरकारी घोषणा के अनुसार, पात्र बिक्री पर उत्पादन से जुड़े अलग-अलग प्रोत्साहन उपलब्ध कराने का प्रावधान है। घरेलू घटकों की खरीद और भारतीय ब्रांडों के डिजाइन एवं अनुसंधान से संबंधित गतिविधियों के लिए भी अतिरिक्त प्रोत्साहन की व्यवस्था घोषित की गई है। सरकार ने योजना की अवधि में कुल मोबाइल फोन उत्पादन लगभग ₹39 लाख करोड़ तक पहुँचने की उम्मीद जताई है। यह एक अनुमानित लक्ष्य है, सुनिश्चित परिणाम नहीं। इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात से मापी जाएगी कि इससे उत्पादन के साथ-साथ भारत में बनने वाले घटकों की हिस्सेदारी, तकनीकी क्षमता, निर्यात और रोजगार में कितनी वृद्धि होती है।

 

भारत के सामने अभी कौन-सी चुनौतियाँ हैं?

मोबाइल निर्माण में दूसरे स्थान पर पहुँचना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आगे की यात्रा आसान नहीं है।

1. महत्वपूर्ण घटकों के लिए आयात पर निर्भरता

मोबाइल निर्माण में घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण घटकों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता बनी रह सकती है। इस निर्भरता को कम करने के लिए भारत को स्थानीय घटक उद्योग, अनुसंधान और उन्नत विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाना होगा।

2. तकनीक और अनुसंधान में निवेश

दुनिया की अग्रणी मोबाइल कंपनियाँ केवल फोन असेंबल नहीं करतीं, बल्कि डिजाइन, सॉफ्टवेयर, चिप, कैमरा तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी अनुसंधान करती हैं। भारत को इस स्तर तक पहुँचने के लिए विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और निजी कंपनियों के बीच सहयोग मजबूत करना होगा।

3. दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा

चीन, वियतनाम और अन्य एशियाई देश इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत को लागत, उत्पादन की गति, गुणवत्ता, बुनियादी ढाँचे और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता के मामले में प्रतिस्पर्धी बने रहना होगा।

4. स्थानीय मूल्यवर्धन बढ़ाना

यदि फोन भारत में बनता है, लेकिन उसके अधिकांश महत्वपूर्ण घटक बाहर से आते हैं, तो उत्पादन के कुल मूल्य का एक हिस्सा विदेशी सप्लाई चेन से जुड़ा रहता है। इसलिए भारत के लिए अगला बड़ा कदम स्थानीय मूल्यवर्धन बढ़ाना होगा, ताकि देश में सिर्फ असेंबली नहीं बल्कि अधिक तकनीकी और औद्योगिक काम भी हो।

 

आने वाले वर्षों में भारत का मोबाइल उद्योग कहाँ पहुँच सकता है?

 

भारत के मोबाइल उद्योग का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि देश वर्तमान उत्पादन क्षमता को किस तरह अधिक तकनीकी और प्रतिस्पर्धी उद्योग में बदलता है।

यदि घरेलू घटक निर्माण बढ़ता है, तो मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को कुछ आवश्यक पार्ट्स के लिए विदेशों पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का असर कम करने और देश में नए औद्योगिक अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।

भारतीय कंपनियों के लिए अपने स्मार्टफोन ब्रांड विकसित करने का भी अवसर है। हालांकि, किसी सफल ब्रांड को स्थापित करने के लिए केवल फैक्ट्री होना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद डिजाइन, सॉफ्टवेयर, गुणवत्ता, बिक्री के बाद सेवा और ग्राहकों के भरोसे पर भी काम करना होगा।

इसी तरह, सेमीकंडक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों के क्षेत्र में क्षमता विकसित करना लंबे समय का काम है। इसमें बड़े निवेश, प्रशिक्षित विशेषज्ञों, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, पानी, मशीनरी और निरंतर अनुसंधान की जरूरत होगी।

अगर भारत इन क्षेत्रों में लगातार प्रगति करता है, तो मोबाइल निर्माण देश के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है।

 

निष्कर्ष: उत्पादन में सफलता के बाद अब तकनीक में मजबूत बनने की चुनौती

 

भारत का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बनना देश के औद्योगिक विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। पिछले एक दशक में मोबाइल उत्पादन और निर्यात में हुई वृद्धि ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।

Make in India, PLI जैसी नीतियाँ, बड़ी कंपनियों का निवेश और भारत का विशाल बाजार इस विकास में महत्वपूर्ण रहे हैं। लेकिन भविष्य की असली सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि भारत कितने मोबाइल फोन बनाता है। यह भी देखना होगा कि मोबाइल के कितने महत्वपूर्ण पार्ट्स देश में बनते हैं, भारतीय कंपनियाँ कितनी तकनीक विकसित करती हैं और इस उद्योग से देश में कितनी उच्च-कौशल वाली नौकरियाँ पैदा होती हैं। यदि भारत उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अनुसंधान, डिजाइन, घटक निर्माण और भारतीय ब्रांडों पर भी ध्यान देता है, तो मोबाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था के लिए और बड़ा अवसर बन सकता है।

 

भारत ने मोबाइल निर्माण में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। अब अगला लक्ष्य केवल दुनिया के लिए मोबाइल बनाना नहीं, बल्कि मोबाइल तकनीक और उसके महत्वपूर्ण घटकों के विकास में भी अपनी पहचान बनाना होना चाहिए।

Research & Analysis by Prinjay Mandani

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