मंगलवार का दिन मिडिल ईस्ट की सियासत के लिए बहुत बड़ा दिन साबित हुआ। दुनिया के 12 ताकतवर पश्चिमी देशों ने मिलकर एक बड़ा फैसला ले लिया है। यह फैसला सीधे इज़राइल की उन बस्तियों से जुड़ा है, जो वेस्ट बैंक में बनी हैं। कूटनीतिक हलकों में इसे वेस्ट बैंक संकट का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है। आइए, पूरी खबर समझते हैं।
वेस्ट बैंक संकट क्या है?
वेस्ट बैंक फिलिस्तीन का एक हिस्सा है। इस पर 1967 से इज़राइल का कब्ज़ा है। यहाँ इज़राइल ने कई बस्तियाँ बसाई हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इन बस्तियों को अवैध माना जाता है। पिछले कुछ महीनों में इन बस्तियों में हिंसा बहुत तेज़ी से बढ़ी है। इसी वजह से वेस्ट बैंक संकट पहले से कहीं ज्यादा गहरा गया है।
इससे पहले भी कई बार यूरोप और कनाडा जैसे देशों ने इज़राइल की बस्ती नीति की आलोचना की थी। लेकिन इस बार पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सीधे व्यापार प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसी वजह से विशेषज्ञ इसे वेस्ट बैंक संकट की सबसे बड़ी कूटनीतिक कार्रवाई मान रहे हैं।
वेस्ट बैंक संकट पर 12 देशों का बड़ा फैसला
मंगलवार को फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, डेनमार्क, स्पेन, फिनलैंड, आयरलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन ने एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने साफ कहा कि वे इज़राइली बस्तियों में बने सामान पर व्यापार प्रतिबंध लगाएंगे। यह कदम वेस्ट बैंक संकट को सुलझाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि ये बस्तियाँ अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे या तो अपने देश में अलग से नियम बनाएंगे, या यूरोपीय संघ के स्तर पर प्रतिबंध का समर्थन करेंगे।
वेस्ट बैंक संकट पर ब्रिटेन का सख्त रुख
ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने संसद में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूके अब इज़राइली बस्तियों से आने वाले सभी सामान पर आयात प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तियों में रहने वाले कुछ लोग फिलिस्तीनियों के खिलाफ "जातीय सफाई" कर रहे हैं। यह बयान वेस्ट बैंक संकट को लेकर ब्रिटेन की अब तक की सबसे कड़ी प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
मिलिबैंड ने यह भी कहा कि इज़राइल सरकार ने अक्सर इन हिंसक घटनाओं को नज़रअंदाज़ किया है।
वेस्ट बैंक संकट में फ्रांस और कनाडा भी साथ आए
ब्रिटेन के फैसले के तुरंत बाद फ्रांस और कनाडा ने भी इसी तरह के प्रतिबंध की घोषणा कर दी। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने कहा कि वेस्ट बैंक "विस्फोट के कगार पर" पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, बेकाबू बस्ती विस्तार और चरमपंथी हमलों ने हालात बिगाड़ दिए हैं।
इस तरह अब कुल 12 देश वेस्ट बैंक संकट पर एक साथ खड़े नज़र आ रहे हैं।
(यह भी पढ़ सकते हैं: ईरान मक्का डिफेंस पैक्ट: 5 बड़े खुलासे, जानें सच)
वेस्ट बैंक संकट की आखिर वजह क्या है?
पिछले महीने इज़राइल ने E1 इलाके में करीब 1,200 घर बनाने के लिए टेंडर जारी किया था। यह इलाका पूर्वी येरुशलम को बाकी फिलिस्तीनी ज़मीन से अलग कर सकता है। इन 12 देशों ने इस फैसले को "अस्वीकार्य" बताया। यही घटना वेस्ट बैंक संकट को एक नई ऊंचाई तक ले गई।
वेस्ट बैंक संकट के आंकड़े क्या कहते हैं?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 11 से 24 अगस्त के बीच इज़राइली बसने वालों ने 80 हमले किए। इनमें लोगों को नुकसान पहुंचा और संपत्ति भी टूटी। साल 2026 में अब तक 1,040 से ज्यादा फिलिस्तीनी घायल हो चुके हैं। इसी साल 79 फिलिस्तीनी, जिनमें 19 बच्चे भी शामिल हैं, इज़राइली सेना या बसने वालों के हाथों मारे गए।
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे और 200 से ज्यादा को बंधक बनाया गया था। उसके बाद से वेस्ट बैंक में 1,100 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि वेस्ट बैंक संकट कितना गंभीर हो चुका है।
यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। इनके पीछे कई परिवार, बच्चे और आम लोग हैं, जिनकी ज़िंदगी इस हिंसा से पूरी तरह बदल गई है। यही वजह है कि दुनिया भर की सरकारें अब चुप नहीं बैठना चाहती हैं।
वेस्ट बैंक संकट पर इज़राइल की तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले पर इज़राइल ने तुरंत जवाब दिया। इज़राइल ने पूर्वी येरुशलम में मौजूद ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दे दिया। इज़राइल के विदेश मंत्री ने ब्रिटेन की लेबर सरकार पर आरोप लगाया कि वह 2024 से सत्ता में आने के बाद से ही इज़राइल विरोधी नीति अपना रही है।
इज़राइल ने बाकी देशों को भी चेतावनी दी है कि वह अपने सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी भी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा।
(यह भी पढ़ सकते हैं: इज़राइल-ग्रीस डिफेंस डील: 3 अरब यूरो में क्या-क्या शामिल है, और भारत को क्यों ध्यान देना चाहिए?)
वेस्ट बैंक संकट में आगे क्या हो सकता है?
12 देशों ने अपने साझा बयान में कहा कि वे किसी भी तरह के ज़मीन कब्जे या जबरन विस्थापन का विरोध करते हैं। उन्होंने इज़राइल से बस्ती विस्तार तुरंत रोकने की मांग की। साथ ही, हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई की भी मांग की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्ट बैंक संकट आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इज़राइल इन देशों की मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
निष्कर्ष: वेस्ट बैंक संकट का भविष्य
वेस्ट बैंक संकट अब सिर्फ फिलिस्तीन और इज़राइल तक सीमित नहीं रहा। यह अब वैश्विक कूटनीति का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे बड़े देशों का एक साथ आना यह दिखाता है कि दुनिया इस मसले को कितनी गंभीरता से ले रही है। आने वाले हफ्तों में वेस्ट बैंक संकट पर और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. वेस्ट बैंक संकट क्या है?
वेस्ट बैंक संकट, इज़राइल की बस्तियों और वहां बढ़ती हिंसा से जुड़ा मामला है। अब इसमें 12 पश्चिमी देश भी सीधे शामिल हो गए हैं।
2. वेस्ट बैंक संकट पर किन-किन देशों ने प्रतिबंध लगाया है?
फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, डेनमार्क, स्पेन, फिनलैंड, आयरलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन ने यह प्रतिबंध लगाया है।
3. यह व्यापार प्रतिबंध किस पर लागू होगा?
यह प्रतिबंध इज़राइली बस्तियों में बने सामान के व्यापार पर लागू होगा, जैसे वहां से आने वाले उत्पाद और सामग्री। हर देश अपने नियम के हिसाब से इसे लागू करेगा, इसलिए कुछ देशों में यह प्रतिबंध ज्यादा सख्त हो सकता है और कुछ में थोड़ा नरम।
4. इज़राइल ने वेस्ट बैंक संकट पर क्या प्रतिक्रिया दी?
इज़राइल ने ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया और इन देशों की नीति की कड़ी आलोचना की।
5. वेस्ट बैंक संकट कब से गहरा रहा है?
वेस्ट बैंक 1967 से इज़राइल के कब्जे में है, लेकिन मौजूदा संकट पिछले कुछ महीनों में बस्ती विस्तार और बढ़ती हिंसा के कारण और गहरा हुआ है।