इराक़ से हटा अमेरिका: 23 साल बाद क्या ईरान के लिए खुला रास्ता?
2 दशक बाद इराक़ से हटा अमेरिका: ईरान के लिए कैसे खुला रास्ता? जानिए पूरा सच
23 साल, करीब 4,500 अमेरिकी मौतें, कभी 1.7 लाख सैनिक और आज इस कहानी का आख़िरी दिन
जी हाँ. इराक़ से हटा अमेरिका। यह सिर्फ़ फ़ौज की वापसी नहीं है। यह पश्चिम एशिया की ताक़त का नक्शा बदल सकती है। ईरान और उसके साथी गुट इसे अपनी जीत बता रहे हैं। इराक़ की सरकार इसे देश की आज़ादी की वापसी कहती है। पर कुर्द और सुन्नी नेता डरे हुए हैं। सच क्या है? आसान भाषा में पूरी बात जानिए।
इराक़ से हटा अमेरिका: आज क्या हुआ?
अमेरिकी सेना आज, यानी 30 सितंबर को, इराक़ में अपने आख़िरी ठिकानों से निकल रही है। रॉयटर्स के मुताबिक़ यह काम बुधवार तक पूरा होना है। एक अमेरिकी अधिकारी ने एपी को भी यही बताया।
बचे हुए "सैकड़ों" जवानों में से ज़्यादातर जॉर्डन और इलाक़े के दूसरे देशों में जाएंगे। ये जवान ज़्यादातर उत्तर के कुर्दिस्तान इलाक़े में तैनात थे।
इराक़ सरकार ने बुधवार और गुरुवार को छुट्टी घोषित की है। जश्न शनिवार तक "संप्रभुता के दिन" नाम से चलेगा। बग़दाद में पोस्टर लगे हैं। उन पर लिखा है: "फ़ैसले का हक़ वापस लेना और घर बनाना।"
इराक़ से हटा अमेरिका, यह बात ज़्यादातर इराक़ियों को पसंद है। पर ईरान समर्थक गुटों की ताक़त से चिंतित लोग इसे जल्दबाज़ी मानते हैं।
इराक़ से हटा अमेरिका, पर वह इराक़ में कब और क्यों आया था?
- मार्च 2003: अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए हमला किया। दावा था कि सद्दाम के पास सामूहिक विनाश के हथियार हैं। यह दावा बाद में सवालों में घिर गया।
- 2007: अमेरिकी सैनिक 1.7 लाख से ज़्यादा हो गए। कभी वहां 500 से ज़्यादा अड्डे थे।
- दिसंबर 2011: ओबामा के दौर में ज़्यादातर लड़ाकू सैनिक लौट गए।
- 2014: आईएसआईएस ने इराक़ और सीरिया का बड़ा हिस्सा क़ब्ज़ा लिया। इराक़ी सरकार के न्योते पर अमेरिका लौटा।
- 2021: लड़ाकू मिशन सलाहकार मिशन में बदला।
- 2024: बाइडन के दौर में समझौता हुआ। गठबंधन का मिशन 2026 में ख़त्म होना तय हुआ।
इस तरह इराक़ से हटा अमेरिका, और दो दशक से लंबा दौर पूरा हुआ।
इराक़ से हटा अमेरिका: 30 सितंबर की तारीख़ किसने तय की?
इराक़ के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी मई में पद पर आए। जुलाई में वे व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले। वहीं उन्होंने कहा कि आख़िरी अमेरिकी सैनिक सितंबर के अंत तक जाएंगे।
द नेशनल से एक इराक़ी अधिकारी ने कहा कि इस तारीख़ पर ज़ोर ख़ुद अल-ज़ैदी ने दिया था। अगस्त में उन्होंने इसे "तय और अंतिम" बताया।
ट्रंप ने कहा, "हमें नहीं लगता कि अब वहां सेना की ज़रूरत है।" उन्होंने ईरान को "मध्य-पूर्व का दबंग" कहा। उनके मुताबिक़ इराक़ को अब ईरान से दिक़्क़त नहीं होगी।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इराक़ को ईरान समर्थक गुटों के हथियार छीनने होंगे। उनके मुताबिक़ इन गुटों ने मौजूदा युद्ध में अमेरिकी जवानों पर 600 से ज़्यादा हमले किए।
पेंटागन का कहना है कि यह वापसी 2024 के समझौते को ही आगे बढ़ाती है। इराक़ से हटा अमेरिका, पर हथियारों का सवाल अब भी बाक़ी है।
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इराक़ से हटा अमेरिका, तो ईरान के लिए रास्ता कैसे खुला?
विश्लेषक इसके तीन कारण गिनाते हैं।
- संतुलन हटा: इराक़ी सुरक्षा विश्लेषक जासिम अल-बहादली के मुताबिक़ अमेरिकी फ़ौज सालों तक ईरान के असर के सामने एक संतुलन थी। अब ईरान को रणनीतिक फ़ायदा मिलेगा।
- असर पहले से गहरा है: रॉयटर्स के मुताबिक़ ईरान और उसके साथियों की इराक़ में पहले से गहरी पकड़ है।
- ईरान का मक़सद: ईरान कहता है कि उसका आख़िरी लक्ष्य अमेरिकी फ़ौज को पूरे मध्य-पूर्व से हटाना है।
ईरानी संसद की सुरक्षा समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मोक़द्दम ने कहा कि अमेरिकियों के जाने के बाद इराक़ में "स्थायी सुरक्षा" रहेगी।
यह विश्लेषकों और ईरानी नेताओं की राय है। इराक़ से हटा अमेरिका, पर नतीजा अभी पक्का नहीं है। इराक़ी सरकार कहती है कि फ़ैसले अब इराक़ के अपने होंगे।
इराक़ से हटा अमेरिका, तो ईरान समर्थक गुट क्या बोले?
इराक़ में ईरान समर्थक गुटों के समूह "इस्लामिक रेज़िस्टेंस इन इराक़" के कमांडर अबू मुज्तबा अल-यासिरी ने इसे "ऐतिहासिक जीत" कहा। उन्होंने इसे "अमेरिकी प्रोजेक्ट की करारी हार" भी बताया।
इराक़ से हटा अमेरिका, गुटों के लिए यह जश्न का मौक़ा है। इन गुटों ने कई बार अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। जवाबी कार्रवाई भी हुई। इस साल के युद्ध में मारे गए 18 अमेरिकी सैनिकों में से 7 इराक़ में थे।
अब सवाल हथियारों का है। अल-ज़ैदी ने कहा है कि गुटों को निहत्था करने का काम जून 2027 तक पूरा होगा। असाइब अहल अल-हक़ और सद्र के गुट का दावा है कि उन्होंने हथियार सरकार को सौंप दिए। पर कताइब हिज़्बुल्लाह और नुजबा कहते हैं कि विदेशी सैनिकों के जाने तक वे हथियार नहीं छोड़ेंगे।
इराक़ से हटा अमेरिका: किसे डर है और क्यों?
कुर्दिस्तान: प्रधानमंत्री मसरूर बारज़ानी के प्रवक्ता ने कहा कि हालात अभी इतने स्थिर नहीं हैं। कुर्द सरकार के मुताबिक़ ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इलाक़े पर 1,000 से ज़्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले हुए। उसे चिंता है कि अमेरिका जाते समय कोई रक्षा प्रणाली नहीं छोड़ रहा।
सुन्नी नेता: अथील अल-नुजैफ़ी ने कहा कि आईएसआईएस "मरा नहीं है"। उनके मुताबिक़ उसके पास अब भी हथियार, ठिकाने और सप्लाई लाइनें हैं।
आईएसआईएस का ख़तरा: एक कुर्द कमांडर ने रॉयटर्स से कहा कि दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से स्लीपर सेल हरकत में हैं। इराक़ी आतंक-रोधी बलों ने उत्तर में दो संभावित आत्मघाती हमलावर मार गिराए। आईएसआईएस कभी इराक़ के एक तिहाई हिस्से पर क़ाबिज़ था।
इसीलिए इराक़ से हटा अमेरिका, तो कई लोग पूछ रहे हैं कि ख़ाली जगह कौन भरेगा।
ईरान युद्ध की छाया
इराक़ से हटा अमेरिका, पर युद्ध की छाया बनी है। 28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले शुरू किए। इराक़ दोनों के बीच फंस गया। ईरान समर्थक गुटों ने खाड़ी देशों की ओर भी ड्रोन और मिसाइल दागे। इसलिए कई खाड़ी देशों ने बग़दाद को ज़िम्मेदार ठहराया। इराक़ अब रिश्ते सुधारना चाहता है।
युद्ध अभी सुलझा नहीं है। सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक़ ईरान ने सात दिन के संघर्ष-विराम और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को चरणों में खोलने का प्रस्ताव दिया है। वह अमेरिका के जवाब का इंतज़ार कर रहा है।
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आगे क्या?
इराक़ से हटा अमेरिका, अब बग़दाद की अपनी परीक्षा है। इराक़ अब अमेरिका, नाटो और दूसरे देशों के साथ अलग-अलग सुरक्षा सहयोग चाहता है। अल-ज़ैदी ने अमेरिकी कंपनियों को निवेश का न्योता भी दिया है। हेगसेथ ने कहा, "सुरक्षित इराक़ मज़बूत व्यापारिक और रक्षा सहयोग का दरवाज़ा खोलता है।"
चार बातों पर नज़र रहेगी: गुट हथियार छोड़ते हैं या नहीं, आईएसआईएस कितना सिर उठाता है, कुर्दिस्तान की हवाई सुरक्षा कैसे होती है, और ईरान का असर कितना बढ़ता है।
निष्कर्ष
इराक़ से हटा अमेरिका, और एक लंबा अध्याय बंद हुआ। इराक़ की सरकार इसे आज़ादी बताती है। इस बार इराक़ से हटा अमेरिका, तो सबकी नज़र बग़दाद पर है। ईरान इसे अपनी जीत मानता है। कुर्द और सुन्नी नेता ख़तरे की चेतावनी दे रहे हैं। असली परीक्षा अब शुरू होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. इराक़ से हटा अमेरिका, तो आख़िरी सैनिक कब जाएंगे?
इराक़ और अमेरिका दोनों की तय तारीख़ 30 सितंबर 2026 है। इसी तक पूरी वापसी होनी है।
2. अमेरिका इराक़ में कितने साल रहा?
इराक़ से हटा अमेरिका 2003 के हमले के करीब 23 साल बाद। रॉयटर्स के मुताबिक़ इस दौरान क़रीब 4,500 अमेरिकी मारे गए।
3. क्या इराक़ से हटा अमेरिका, तो इराक़ ईरान के हाथ में चला जाएगा?
यह पक्का नहीं है। विश्लेषक ईरान को रणनीतिक फ़ायदे की बात कहते हैं। पर इराक़ी सरकार अपने फ़ैसले ख़ुद लेने का दावा करती है।
4. अब इराक़ की सुरक्षा कौन संभालेगा?
इराक़ी सुरक्षा बल। इराक़ अलग-अलग देशों से सुरक्षा सहयोग भी चाहता है।
5. क्या अमेरिका पूरा पश्चिम एशिया छोड़ रहा है?
नहीं। इराक़ से हटा अमेरिका, पर पश्चिम एशिया नहीं छोड़ा। ज़्यादातर जवान जॉर्डन और इलाक़े के दूसरे देशों में जाएंगे। ईरान के साथ तनाव भी बना हुआ है।
Research & Analysis by Swati Sharma
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