भारत और US दोस्त या मतलबी: इंजन तो लेते हैं, फाइटर जेट क्यों नहीं?

Aug 26, 2026
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सोचिए, दो देश दोस्त हैं। एक देश को इंजन चाहिए, तो दूसरा तुरंत देने को तैयार है। लेकिन जब बात पूरे फाइटर जेट की आती है, तो वही दोस्त पीछे हट जाता है। अजीब लगता है ना? यही सवाल आजकल हर कोई पूछ रहा है कि भारत और US दोस्त या मतलबी हैं। आइए, इस पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि इसका क्या कारण है।

 

 

 

इंजन की डील में हाँ, फाइटर जेट में ना क्यों?

भारत की एयरफोर्स के पास तेजस फाइटर जेट है। इसमें अभी अमेरिकी कंपनी GE का F404 इंजन लगता है। लेकिन इस इंजन की सप्लाई में देरी हो रही है, जिससे तेजस Mk1A के उत्पादन में रुकावट आई है, इसलिए भारत अब खुद का कावेरी 2.0 इंजन विकसित कर रहा है ताकि अमेरिकी इंजन पर निर्भरता कम हो सके .

अगली पीढ़ी के तेजस Mk2 के लिए भारत ने अमेरिका से F414 इंजन खरीदने की बात की है। लेकिन यहां भी भारत ने साफ शर्त रखी है कि कम से कम 80 प्रतिशत तकनीक ट्रांसफर के बिना यह डील आगे नहीं बढ़ेगी। यह इंजन F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट में इस्तेमाल होने वाला वही शक्तिशाली इंजन है, जिसे तेजस Mk2 और आने वाले स्वदेशी AMCA फाइटर जेट के लिए भी चुना गया है। यही वो जगह है जहां लोग सवाल उठाते हैं कि भारत और US दोस्त या मतलबी, क्योंकि इंजन के लिए भारत बार-बार शर्तें रख रहा है, फिर भी डील पूरी नहीं हो पा रही।

 

F-35 का ऑफर, और भारत का साफ इनकार

अमेरिका ने भारत को अपना सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट F-35 खरीदने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन भारत ने इसे मानने से इनकार कर दिया। यह फैसला उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया था।

भारत सरकार ने संसद में भी यह साफ किया कि इस मुद्दे पर अमेरिका से अभी तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। इसके बदले खबरें आईं कि भारत रूस से सुखोई-57 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर रहा है। यानी एक तरफ इंजन की बात चल रही है, दूसरी तरफ पूरा फाइटर जेट अमेरिका से लेने से भारत बच रहा है। इन ही वजहों से सोचने पर मजबूर होते हैं कि भारत और US दोस्त या मतलबी?

 

भारत और US दोस्त या मतलबी: नाविकों की मौत ने बढ़ाया तनाव

इसी बीच एक और बड़ी घटना हुई, जिसने दोनों देशों के रिश्ते को और मुश्किल बना दिया। ओमान तट के पास हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। यह घटना MT सेटबेलो नाम के तेल टैंकर पर हुई कार्रवाई के दौरान हुई।

भारत ने इस पर तुरंत सख्त रुख अपनाया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सीधे फोन पर बात की और भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। इतना ही नहीं, भारत ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को दो बार तलब भी किया।

यहीं से एक बड़ा सवाल पैदा होता है, जिसे हर भारतीय आज पूछ रहा है कि कूटनीति पर सवाल: क्या 3 नाविकों की मौत पर भारत को अमेरिका को कड़ा जवाब देना चाहिए? कुछ जानकार तो यहां तक कहते हैं कि भारत को अमेरिका से बिना शर्त माफी, पूरे मामले की जांच, और मृत नाविकों के परिवारों को मुआवजा मांगना चाहिए। यह सिर्फ एक घटना नहीं है, यह भरोसे का सवाल है. और इन्हीं चीज़ों की वजह से सवाल उठता है कि भारत और US दोस्त या मतलबी हैं.

 

 

 

ट्रम्प 2.0 और भारत-अमेरिका संबंध पर असर

इन सारी घटनाओं को देखकर यह समझना जरूरी है कि ट्रम्प 2.0 और भारत अमेरिका संबंध पहले जैसे आसान नहीं रहे - टैरिफ, फाइटर जेट डील, और अब नाविकों की मौत, हर मोर्चे पर तनाव नजर आ रहा है। दोनों देश एक-दूसरे के लिए जरूरी हैं, यह सच है। लेकिन जब बात व्यापार और रक्षा सौदों की आती है, दोनों तरफ से सख्ती बढ़ती जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के स्तर पर बातचीत अभी भी जारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा सचिव के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें दोनों देशों ने अपने रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। तो एक तरफ बातचीत का दरवाजा खुला है, दूसरी तरफ भरोसे में कमी भी साफ दिख रही है। इसीलिए यह समझना ज़रूरी है कि भारत और US दोस्त या मतलबी हैं, जो बस मतलब में साथ दें, वरना नहीं।

 

तो आखिर, भारत और US दोस्त या मतलबी?

सच यह है कि दोनों देशों का रिश्ता न पूरी तरह दोस्ती है, न पूरी तरह मतलब। यह एक साझेदारी है, जिसमें दोनों देश अपने-अपने फायदे को सबसे ऊपर रखते हैं। भारत इंजन जैसी तकनीक अमेरिका से लेना चाहता है, क्योंकि यह उसकी जरूरत है। लेकिन पूरा फाइटर जेट खरीदने से बचता है, क्योंकि वह अपनी रक्षा क्षमता में आत्मनिर्भर बनना चाहता है।

नाविकों की मौत जैसी घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि रिश्ते में जज़्बात और भरोसा भी उतना ही मायने रखता है, जितना कारोबार। इसलिए जब भी कोई पूछे - भारत और US दोस्त या मतलबी - तो शायद सबसे सही जवाब यही होगा: यह दोस्ती भी है, और सौदेबाज़ी भी। दोनों साथ-साथ चलती हैं, और आने वाले समय में यही तय करेगा कि यह रिश्ता किस दिशा में जाएगा।

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. भारत अमेरिका से फाइटर जेट इंजन क्यों खरीदता है, लेकिन पूरा जेट क्यों नहीं?

भारत को इंजन जैसी तकनीक की जरूरत है, इसलिए वह इंजन डील में शर्तों के साथ बातचीत करता है। लेकिन पूरा फाइटर जेट खरीदने से भारत बचता है क्योंकि वह अपनी रक्षा क्षमता में आत्मनिर्भर बनना चाहता है। यही अंतर लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर भारत और US दोस्त या मतलबी हैं।

 

2. GE F414 इंजन डील में भारत की क्या शर्त है?

भारत ने साफ कहा है कि कम से कम 80 प्रतिशत तकनीक ट्रांसफर के बिना यह डील आगे नहीं बढ़ेगी। यह इंजन तेजस Mk2 और AMCA फाइटर जेट के लिए इस्तेमाल होगा।

 

3. भारत ने अमेरिका से F-35 फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदा?

अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसके बाद भारत सरकार ने F-35 खरीदने की किसी भी योजना से इनकार कर दिया, और अभी तक इस पर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।

 

4. तीन भारतीय नाविकों की मौत कैसे हुई?

ओमान तट के पास हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान MT सेटबेलो तेल टैंकर पर यह घटना हुई, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई।

 

5. भारत ने नाविकों की मौत पर क्या कदम उठाए, और क्या यह दिखाता है कि रिश्ता सिर्फ मतलब का है?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही भारत ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को दो बार तलब भी किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत और US दोस्त या मतलबी।

 

 

 

Research & Analysis by Swati Sharma

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