जगन मोहन रेड्डी CJP के समर्थन में क्यों आए? NDA से दूरी के संकेत?

Oct 19, 2026
(0)

CJP मामला क्या है?

CJP यानी Cockroach Janta Party का मामला चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और वोटरों के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर विरोध किया था।

इन दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जगन मोहन रेड्डी ने 15 अक्टूबर को कहा कि गिरफ्तारी से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बहाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिस्टम में कोई खामी है तो उसे ठीक किया जाना चाहिए।

जगन का यह बयान इसलिए खास था, क्योंकि वे पहले राष्ट्रीय स्तर पर BJP और NDA सरकार के खिलाफ इस तरह खुलकर बोलने से बचते रहे थे। अब वे CJP जैसे छोटे राजनीतिक समूह के नेताओं के समर्थन में आ गए हैं। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जगन अपनी राजनीति का नया रास्ता तलाश रहे हैं।  यह भी पढ़ें: CJP Protest: तिरंगा मार्च के बीच गूंजे ‘मोदी-मोदी’ के नारे, नेहा बोरा और अभिजीत दिपके की हिरासत के बाद CP में भारी ड्रामा

 

जगन ने CJP के समर्थन में क्या कहा?

जगन ने कहा कि CJP नेताओं की गिरफ्तारी से चुनावी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल खत्म नहीं होंगे। उनके मुताबिक, लोगों को भरोसा होना चाहिए कि उनके वोट का अधिकार सुरक्षित है और चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से चल रही है।

यहां जगन ने केवल गिरफ्तारी का विरोध नहीं किया, बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर भी पारदर्शिता की मांग की।

इसका राजनीतिक महत्व भी है। आंध्र प्रदेश में जगन की YSRCP अब विपक्ष में है। राज्य में चंद्रबाबू नायडू की TDP के नेतृत्व वाली सरकार है, जिसमें BJP और Jana Sena भी शामिल हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना जगन को राज्य सरकार और केंद्र की BJP के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा देता है।

हालांकि, मतदाता सूची में अवैध तरीके से नाम हटाए जाने के आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी खास मामले में गड़बड़ी साबित करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और जांच के नतीजे जरूरी हैं।

 

2023 में YSRCP ने किस कानून का समर्थन किया था?

इस पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा है Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023।

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने Anoop Baranwal मामले में व्यवस्था दी थी कि जब तक संसद नियुक्ति प्रक्रिया पर कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) वाली समिति की सलाह पर होनी चाहिए।

इसके बाद केंद्र सरकार ने 2023 में नया कानून बनाया। इसमें चयन समिति से CJI को हटा दिया गया और उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। अब तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं।

इस व्यवस्था में सरकार के दो प्रतिनिधि और विपक्ष का एक प्रतिनिधि होता है। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि ऐसी समिति में सरकार को बहुमत मिलने से नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह हो सकता है।

सबसे अहम बात: YSRCP ने उस समय इस कानून का समर्थन किया था, जबकि विपक्ष के कई दल इसका विरोध कर रहे थे। अब जगन उसी फैसले पर अफसोस जता रहे हैं।

 

अब उसी फैसले पर जगन को अफसोस क्यों?

18 अक्टूबर 2026 को जगन ने साफ कहा कि उनकी पार्टी को 2023 के कानून का समर्थन करने पर अफसोस है। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया को बदलने और CJI को चयन समिति में वापस शामिल करने की मांग की।

जगन की दलील है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सरकार का जरूरत से ज्यादा प्रभाव न हो। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था की तुलना ऐसी स्थिति से की, जहां छात्र ही अपना परीक्षक चुन लें। उनका कहना है कि चुनाव कराने वाली संस्था की स्वतंत्रता पर लोगों का भरोसा होना जरूरी है। 

लेकिन सवाल है कि यह बदलाव अब क्यों आया?

इसका एक कारण चुनाव आयोग को लेकर चल रही बहस है। दूसरा कारण आंध्र प्रदेश की बदली हुई राजनीति है। 2024 में सत्ता से बाहर होने के बाद YSRCP को अब राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करनी है। चुनावी निष्पक्षता का मुद्दा जगन को अपने समर्थकों को एकजुट करने और विपक्षी दलों के साथ साझा मुद्दा बनाने का मौका देता है।

यह भी संभव है कि जगन को अपने पुराने रुख की राजनीतिक कीमत समझ में आई हो। हालांकि, उनके बयान के पीछे सिर्फ राजनीतिक फायदा ही कारण है, ऐसा निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा।

 

CEC नियुक्ति प्रक्रिया में CJI का मुद्दा क्या है?

मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC की नियुक्ति को लेकर विवाद का मूल सवाल है क्या नियुक्ति समिति में केंद्र सरकार का प्रभाव बहुत ज्यादा है?

2023 के कानून से पहले सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था में CJI को चयन समिति में जगह दी थी। लेकिन संसद के कानून ने CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए मंत्री को शामिल कर दिया।

आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री और उनके द्वारा नामित मंत्री दोनों एक ही सरकार का हिस्सा हैं। ऐसे में चयन समिति में सरकार का पलड़ा भारी हो जाता है। दूसरी तरफ, केंद्र का पक्ष रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया कानून के तहत चल रही है और चुनी हुई सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारियों पर भी भरोसा होना चाहिए।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती के तहत है। सितंबर 2026 में दो जजों की बेंच इस बात पर अलग-अलग राय पर पहुंची कि चुनौती को पांच जजों की संविधान पीठ के सामने भेजना चाहिए या नहीं। मामला आगे विचार के लिए CJI के पास भेजा गया। इसका मतलब यह नहीं कि 2023 का कानून रद्द हो चुका है; उसकी संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला अलग मुद्दा है।

जगन अब इसी चयन समिति में CJI को वापस शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इससे उनका रुख उन विपक्षी दलों के करीब आता है जो लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं।

 

क्या Jagan NDA से दूरी बना रहे हैं?

जगन की हालिया बयानबाजी से यह संकेत जरूर मिलता है कि YSRCP अब केंद्र सरकार के हर मुद्दे पर पहले की तरह समर्थन देने के बजाय अपना रुख बदल रही है।

पिछले कई सालों में YSRCP ने संसद में NDA सरकार के कई महत्वपूर्ण फैसलों का समर्थन किया था। पार्टी ने 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून के साथ-साथ कई दूसरे मुद्दों पर भी केंद्र के साथ सहयोग किया। हालांकि, YSRCP और BJP के बीच यह सहयोग औपचारिक गठबंधन के बराबर नहीं था।

अब स्थिति बदल रही है। जगन चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं, CJP नेताओं के समर्थन में बोल रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

इस बदलाव को NDA से संभावित दूरी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन अभी तक इसे BJP से औपचारिक रिश्ता तोड़ने या किसी दूसरे गठबंधन में शामिल होने का ऐलान नहीं माना जा सकता।

 

YSRCP और NDA के रिश्ते पहले कैसे रहे?

2019 से 2024 के बीच जगन की YSRCP आंध्र प्रदेश में सत्ता में थी। उस दौरान संसद में पार्टी ने कई मुद्दों पर केंद्र सरकार का समर्थन किया। इसमें नागरिकता संशोधन कानून (CAA), अनुच्छेद 370 हटाने और 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून जैसे मुद्दे शामिल रहे।

2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद आंध्र प्रदेश की राजनीति पूरी तरह बदल गई। चंद्रबाबू नायडू की TDP, Jana Sena और BJP के गठबंधन ने राज्य में सत्ता हासिल की। YSRCP विधानसभा में केवल 11 सीटों पर सिमट गई और लोकसभा में उसे चार सीटें मिलीं। 

इसके बावजूद YSRCP ने केंद्र में NDA के कुछ महत्वपूर्ण संसदीय फैसलों का समर्थन जारी रखा। यही वजह है कि जगन का मौजूदा रुख एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

अब जब TDP राज्य में सत्ता में है और BJP केंद्र में सरकार चला रही है, तो जगन के लिए दोनों के खिलाफ मुद्दे उठाना राजनीतिक रूप से उपयोगी हो सकता है। लेकिन पार्टी का अगला कदम क्या होगा, यह उसके आने वाले फैसलों से ही साफ होगा।

 

2024 की हार के बाद Jagan की strategy कैसे बदली?

2024 की हार ने YSRCP को सत्ता से बाहर कर दिया और जगन को राज्य की राजनीति में नई रणनीति अपनाने की जरूरत पड़ी। अब पार्टी को अपने कैडर को सक्रिय रखना है, विपक्ष की भूमिका मजबूत करनी है और TDP के नेतृत्व वाली सरकार को चुनौती देने के लिए बड़े मुद्दे तलाशने हैं।

चुनावी निष्पक्षता ऐसा मुद्दा है, जिस पर YSRCP दूसरे विपक्षी दलों के साथ भी बात कर सकती है। इससे पार्टी को राज्य की सीमाओं से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज उठाने का मौका मिलता है।

जगन का CJP के समर्थन में आना भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। छोटे समूह के नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध करके वे चुनावी अधिकारों और संस्थाओं की निष्पक्षता को चर्चा में ला रहे हैं।

साथ ही, YSRCP ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों का जवाब संबंधित संस्थाओं और दस्तावेजों से ही मिल सकता है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह मुद्दा पार्टी को अपनी बात रखने का अवसर देता है।

 

क्या INDIA Bloc के लिए दरवाजा खुल रहा है?

जगन के नए रुख के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या YSRCP कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA Bloc के करीब जा सकती है।

फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि YSRCP और विपक्षी दलों के बीच कुछ मुद्दों पर समानता बढ़ रही है। चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया, मतदाता सूची और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर अलग-अलग विपक्षी पार्टियां सवाल उठा रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, YSRCP ने CPI और CPI(M) जैसे वामपंथी दलों से भी संपर्क किया है। पार्टी के लिए राज्य में TDP गठबंधन का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय और वामपंथी दलों के साथ सहयोग एक विकल्प हो सकता है। 

लेकिन कांग्रेस के साथ औपचारिक गठबंधन को लेकर अभी स्पष्ट संकेत नहीं हैं। जगन और उनकी बहन वाई.एस. शर्मिला के बीच राजनीतिक मतभेद भी इस समीकरण को जटिल बनाते हैं। इसलिए INDIA Bloc में YSRCP की एंट्री को फिलहाल संभावना और राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखना चाहिए।

 

आंध्र प्रदेश की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

आंध्र प्रदेश में अभी TDP के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है। YSRCP के लिए चुनौती है कि वह विधानसभा में अपनी कमजोर स्थिति से बाहर निकले और समर्थकों को फिर से सक्रिय करे।

अगर जगन चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दों पर दूसरे विपक्षी दलों के साथ साझा अभियान चलाते हैं, तो इससे राज्य में विपक्षी राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। इससे TDP सरकार पर भी दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन मुद्दों पर जहां विपक्ष प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।

हालांकि, सिर्फ CJP को समर्थन देने या 2023 के कानून पर अफसोस जताने से राज्य की राजनीति तुरंत नहीं बदल जाएगी। इसके लिए YSRCP को लगातार अभियान चलाना होगा, अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य रखने होंगे और जनता के बीच भरोसा मजबूत करना होगा।

दूसरी तरफ, BJP और TDP इस बदलाव को YSRCP की राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश कर सकते हैं। आने वाले दिनों में यह भी देखना होगा कि जगन संसद में केंद्र के फैसलों पर अपना पुराना समर्थन जारी रखते हैं या अब ज्यादा मुद्दों पर विरोध करते हैं।

 

निष्कर्ष: यह राजनीतिक बदलाव का संकेत है, गठबंधन का ऐलान नहीं

जगन मोहन रेड्डी का 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर अफसोस जताना और CJP के नेताओं का समर्थन करना उनकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पहले YSRCP ने NDA सरकार के कई फैसलों का समर्थन किया था, लेकिन अब जगन चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों पर ज्यादा आक्रामक रुख अपना रहे हैं।

2024 की चुनावी हार, आंध्र प्रदेश में TDP गठबंधन की मजबूत स्थिति और विपक्ष में YSRCP की भूमिका इस बदलाव को समझने के जरूरी पहलू हैं।

फिलहाल यह कहना सही होगा कि जगन अपनी राजनीतिक स्थिति दोबारा तय करने का संकेत दे रहे हैं। लेकिन यह INDIA Bloc में शामिल होने या NDA से औपचारिक रूप से अलग होने का प्रमाण नहीं है। आने वाले महीनों में उनके संसदीय रुख, विपक्षी दलों के साथ सहयोग और आंध्र प्रदेश में राजनीतिक अभियान से तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

भू-राजनीति और वैश्विक कूटनीति के सभी विश्लेषण

विश्व राजनीति, युद्ध संकट, रक्षा तकनीक और भारत की विदेश नीति से जुड़े सभी विस्तृत लेख पढ़ने के लिए हमारे मुख्य हब पर जाएं।

Research & Analysis by Prinjay Mandani

Making world politics and global facts easy for everyone. We turn complex international news into clear Hindi insights, helping you understand the world without borders.

7 Views

You Might Also Like

CJP Protest: अभिजीत दिपके को मिली बेल, ₹50 हजार के पीस बॉन्ड की शर्त Politics

CJP Protest: अभिजीत दिपके को मिली बेल, ₹50 हजार के पीस बॉन्ड की शर्त

CJP Protest: अभिजीत दिपके को मिली बेल, लेकिन रिहाई के लिए कोर्ट ने रखी ₹50 हजार के ‘पीस बॉन्ड’ की ये बड़ी शर्त!दिल्ली में CJP …

Read Article →
वेस्ट बैंक संकट: ब्रिटेन, कनाडा और फ़्रांस समेत 12 पश्चिमी देशों की आर्थिक नाकेबंदी की नई रणनीति Politics

वेस्ट बैंक संकट: ब्रिटेन, कनाडा और फ़्रांस समेत 12 पश्चिमी देशों की आर्थिक नाकेबंदी की नई रणनीति

मंगलवार का दिन मिडिल ईस्ट की सियासत के लिए बहुत बड़ा दिन साबित हुआ। दुनिया के 12 ताकतवर पश्चिमी देशों ने मिलकर एक बड़ा फैसला …

Read Article →
AfD सैक्सनी-एनहाल्ट चुनाव 2026: 44% वोट पाकर भी सत्ता से दूर - CDU का 17.2% क्या कहता है? Politics

AfD सैक्सनी-एनहाल्ट चुनाव 2026: 44% वोट पाकर भी सत्ता से दूर - CDU का 17.2% क्या कहता है?

जर्मनी के राज्य सैक्सनी-एनहाल्ट में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। AfD सैक्सनी-एनहाल्ट चुनाव 2026 में …

Read Article →

Comments

0
?