भारतीय सेना का आधुनिकीकरण: दो मोर्चों पर लड़ाई या महज एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की तैयारी?
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भू-राजनीति (Geopolitics) केवल मानचित्र पर सीमाओं और संधियों का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह वह शक्ति-संरचना है जो तय करती है कि विश्व में ऊर्जा, व्यापार मार्ग, आर्थिक समृद्धि और सैन्य सुरक्षा का नियंत्रण किसके पास रहेगा। 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंध बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर अग्रसर हैं, जहाँ महाशक्तियों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा, खनिज संसाधनों की आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री चोक-पॉइंट्स पर प्रभाव स्थापित करने की होड़ मची है।
भारत के दृष्टिकोण से, रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना हमारी विदेश नीति का मूल स्तंभ है। चाहे पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा हो, यूरेशिया और लाल सागर के व्यापारिक गलियारों की स्थिरता हो, अथवा हिंद महासागर में चीन की उपस्थिति का संतुलन—वैश्विक घटनाक्रमों का सीधा प्रभाव भारत के प्रत्येक नागरिक, मुद्रास्फीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।
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भू-राजनीति (Geopolitics) भूगोल, इतिहास और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का वह संगम है जो तय करता है कि विभिन्न देश अपनी सीमाओं, प्राकृतिक संसाधनों, समुद्री व्यापार मार्गों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा व विस्तार के लिए क्या नीतियां अपनाते हैं। भारत जैसी उभरती वैश्विक शक्ति के लिए भू-राजनीतिक समझ ऊर्जा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आर्थिक विकास हेतु अत्यंत आवश्यक है।
भारत की विदेश नीति 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy), 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है), 'पड़ोसी प्रथम' (Neighborhood First नीति) और 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) पर आधारित है। भारत किसी भी सैन्य गुट का हिस्सा बने बिना राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को सर्वोपरि रखते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित साझेदारी रखता है।
वैश्विक संघर्षों का सीधा प्रभाव भारत की कच्चे तेल व ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री शिपिंग मार्गों (जैसे स्वेज नहर और लाल सागर) की सुरक्षा, रक्षा उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स, और वैश्विक मुद्रास्फीति (कमोडिटी कीमतों) पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, विदेशों में कार्यरत लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा भी सीधे तौर पर प्रभावित होती है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र विश्व के सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्गों (Sea Lines of Communication) को समाहित करता है। भारत के विदेशी व्यापार का 90% से अधिक हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। चीन की समुद्री विस्तारवादी नीतियों को संतुलित करने, मलक्का जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और एक स्वतंत्र व नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्वाड (QUAD) और इंडो-पैसिफिक रणनीति भारत के लिए रणनीतिक रूप से अपरिहार्य है।